एच.एम. जोशी को चंबल और बुंदेलखंड के बीहड़ों को डकैतों से मुक्त कराने और कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए याद किया जाता है।

भोपाल : मध्य प्रदेश पुलिस के इतिहास का एक सुनहरा अध्याय आज अपने जीवन के 100 वर्ष पूरे कर चुका है। भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 1948 में शुरू हुए पहले बैच के संभवतः अकेले जीवित सदस्य, पूर्व पुलिस महानिदेशक हरिवल्लभ मोहनलाल जोशी का 100वां जन्मदिन बड़े ही भव्य तरीके से मनाया गया।

भोपाल स्थित पुलिस ऑफिसर्स मेस में आयोजित इस भावुक समारोह में मध्य प्रदेश IPS एसोसिएशन ने अपने इस मार्गदर्शक और अनुशासित संरक्षक को सम्मानित किया।

​चंबल और बुंदेलखंड से डाकुओं का अंत

​जोशी जी का कार्यकाल मध्य प्रदेश पुलिस के लिए प्रेरणा का स्रोत माना जाता है। उन्होंने चंबल और बुंदेलखंड के बीहड़ों में डकैतों की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए बेहद योजनाबद्ध और साहसी अभियान चलाए थे। मौजूदा DGP कैलाश मकवाना ने उनके विजन को सलाम करते हुए बताया कि जोशी जी के नेतृत्व में न केवल खूंखार डकैतों का सफाया हुआ, बल्कि बड़ी संख्या में डाकुओं ने आत्मसमर्पण भी किया, जिससे उन दुर्गम क्षेत्रों में विकास का रास्ता साफ हुआ।

​सम्मान का प्रतीक

​समारोह का सबसे यादगार और भावुक पल वह था जब 2024 बैच की प्रोबेशनरी IPS अधिकारी काजल सिंह (ASP उज्जैन) ने 100 वर्षीय वरिष्ठ अधिकारी को गुलदस्ता भेंट कर आशीर्वाद लिया। IPS एसोसिएशन ने इस लम्हे को पुलिस सेवा की अटूट परंपरा और सम्मान का प्रतीक बताया, जहाँ एक नई पीढ़ी अपने सबसे अनुभवी पूर्वज से सेवा के मूल मंत्र सीख रही थी।

IPS अधिकारी काजल सिंह ने एच.एम. जोशी 100 वर्षीय को गुलदस्ता भेंट कर आशीर्वाद लिया।

​'कर्म ही पूजा है' का मूल मंत्र

​100 साल की उम्र में भी सकारात्मक सोच और ऊर्जा रखने वाले एच.एम. जोशी ने कार्यक्रम के दौरान युवा अधिकारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि "पुलिस सेवा समाज की सेवा का सबसे बड़ा माध्यम है"। जोशी जी ने अपने जीवन के मूल मंत्र 'कर्म ही पूजा है' को दोहराते हुए सभी युवा अधिकारियों को पूरी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ जनता की सेवा करने के लिए प्रेरित किया।

​मध्य प्रदेश पुलिस सेवा का एक जीवित इतिहास

​एच.एम. जोशी का सफर केवल एक करियर नहीं, बल्कि भारतीय पुलिस सेवा के अनुशासन और गौरव का प्रतीक है। उनके कार्यकाल के दौरान पुलिसिंग में आए बदलाव और उनके द्वारा स्थापित किए गए मापदंड आज भी अधिकारियों के लिए मार्गदर्शक का काम करते हैं। वर्तमान DGP मकवाना ने उनके विजन की सराहना करते हुए कहा कि उनके दिखाए रास्ते पर चलकर ही पुलिस बल को आधुनिक और जनप्रिय बनाया जा सकता है।