भोपाल। एक महत्वपूर्ण फैसले में बीमा कंपनी को क्लेम न देने के कारण भारी रकम चुकाने का आदेश दिया गया है। यह मामला एक फैक्ट्री में लगी आग और उसके बाद बीमा कंपनी द्वारा उचित भुगतान न करने से जुड़ा हुआ है। उपभोक्ता आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए बीमा कंपनी को लगभग डेढ़ करोड़ रुपये देने का निर्देश दिया है। मामले के अनुसार अयोध्या बायपास क्षेत्र में रहने वाले एक उद्योग संचालक ने अपनी फैक्ट्री लक्ष्मी श्री इंडस्ट्री के लिए बैंक से वर्ष 2019 में लोन लिया था।
फैक्ट्री का करवाया था फायर इंस्योरेंस
इस ऋण की सुरक्षा के लिए उन्होंने फैक्ट्री और उसमें रखे सामान का फायर इंश्योरेंस करवाया था, ताकि किसी दुर्घटना की स्थिति में नुकसान की भरपाई हो सके। लेकिन मार्च 2020 में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी, जब 14 मार्च की रात फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि फैक्ट्री में रखा पूरा माल और स्टॉक जलकर नष्ट हो गया। घटना के बाद उद्योग संचालक ने तुरंत बीमा कंपनी को इसकी सूचना दी। कंपनी ने नियम के अनुसार नुकसान का आकलन करने के लिए सर्वेयर नियुक्त किया।
बीमा कंपनी ने 30 लाख देने का प्रस्ताव किया
सर्वेयर ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट में बताया कि आग से लगभग 1.15 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। हालांकि रिपोर्ट आने के बावजूद बीमा कंपनी ने पूरी राशि देने के बजाय अलग कदम उठाया। कंपनी ने एक अतिरिक्त जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया, जबकि नियामक नियमों के अनुसार ऐसा करना उचित नहीं माना जाता। जांच प्रक्रिया के दौरान बीमा कंपनी ने पीड़ित को केवल 30 लाख रुपए का भुगतान करने का प्रस्ताव दिया। यह राशि वास्तविक नुकसान की तुलना में बहुत कम थी।
2021 में खटखटाया आयोग का दरवाजा
जब उद्योग संचालक ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, तो कंपनी ने पूरा क्लेम ही खारिज कर दिया। इससे परेशान होकर पीड़ित ने वर्ष 2021 में उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया और न्याय की मांग की। मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने दोनों पक्षों के दस्तावेज और सबूतों का अध्ययन किया। आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी ने क्लेम निपटाने में नियमों का पालन नहीं किया और उपभोक्ता के साथ अनुचित व्यवहार किया। इसलिए आयोग ने कंपनी को सेवा में कमी का दोषी ठहराया और आदेश दिया वह ब्याज और अन्य दंडात्मक राशि सहित लगभग 1.28 करोड़ रुपए पीड़ित को दो माह में भुगतान करे।