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दतिया में प्रशासनिक सख्ती के तहत कलेक्टर ने लापरवाही के आरोपों पर एसडीएम संतोष तिवारी को हटा दिया है। उनकी जगह संयुक्त कलेक्टर लोकेंद्र सिंह सरल को नया एसडीएम और कार्यकारी दंडाधिकारी नियुक्त किया गया है।

दतिया। जिले में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को दुरुस्त करने के लिए बड़ा फैसला लिया गया है। कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने लापरवाही के आरोपों के चलते एसडीएम संतोष कुमार तिवारी को उनके पद से हटा दिया है। उनकी जगह अब संयुक्त कलेक्टर लोकेंद्र सिंह सरल को दतिया का नया एसडीएम नियुक्त किया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था में तेजी आने की उम्मीद है। इस बदलाव को शासन की जवाबदेही और कार्यकुशलता बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय स्तर पर इस निर्णय के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल भी देखी जा रही है।

लापरवाही और लंबित मामलों पर हुई कार्रवाई 
सूत्रों के अनुसार, पूर्व एसडीएम पर काम में ढिलाई बरतने के आरोप लंबे समय से लग रहे थे। बताया गया कि उनके पास कई जांच और फाइलें काफी समय से लंबित थीं। इन मामलों के समय पर निपटारे न होने से प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे थे। कलेक्टर ने स्थिति की समीक्षा के बाद यह सख्त कदम उठाया। प्रशासन का मानना है कि जिम्मेदारी तय किए बिना कार्यप्रणाली में सुधार संभव नहीं है। इसी कारण तत्काल बदलाव करते हुए नई नियुक्ति की गई है।

लोकेंद्र सिंह सरल को मिली अहम जिम्मेदारी 
जारी आदेश के मुताबिक, अब संयुक्त कलेक्टर लोकेंद्र सिंह सरल को एसडीएम दतिया का प्रभार दिया गया है। इसके साथ ही उन्हें कार्यकारी दंडाधिकारी  की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। नए पदभार के साथ उन्हें कानून-व्यवस्था और राजस्व कार्यों की निगरानी करनी होगी। सरल के पास पहले से प्रशासनिक अनुभव है, जिसे देखते हुए यह जिम्मेदारी दी गई है। उम्मीद की जा रही है कि वे लंबित मामलों को प्राथमिकता से निपटाएंगे। उनकी नियुक्ति से विभागों के बीच समन्वय बेहतर होने की संभावना जताई जा रही है। 

प्रशासनिक कामकाज में तेजी की उम्मीद 
इस बदलाव के बाद जिले में रुके हुए कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। खासकर राजस्व और जांच से जुड़े मामलों में तेजी आने की संभावना है। प्रशासन का लक्ष्य है कि आम जनता से जुड़े मुद्दों का समय पर समाधान हो सके। नए एसडीएम से अपेक्षा की जा रही है कि वे पारदर्शिता और दक्षता के साथ काम करेंगे। यह निर्णय यह भी संकेत देता है कि लापरवाही के मामलों में कलेक्टर सख्त रुख अपनाएंगे। कुल मिलाकर, यह फेरबदल जिले की प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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