छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड में 30 बच्चों की मौत को गंभीर मानते हुए हाई कोर्ट ने डॉक्टर प्रवीण सोनी सहित चार आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी।

मध्यप्रदेश। छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड (Chhindwara Cough Syrup Scandal) मामले में आरोपियों की जमानत याचिका पर हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। बच्चों की मौत को बेहद गंभीर मानते हुए एमपी हाई कोर्ट ने डॉक्टर प्रवीण सोनी समेत चार आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। मंगलवार को हुई इस सुनवाई के बाद अब चारों आरोपियों को जेल में ही रहना होगा। 2 फरवरी को जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने फैसला सुरक्षित कर रख लिया था।

सीनियर डॉक्टर की सलाह नजरअंदाज
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि, आरोपी डॉक्टर ने सरकारी निर्देशों का पालन नहीं किया और चार साल से कम उम्र के बच्चों को प्रतिबंधित फिक्स डोज कम्पाउंड दवा दी। इसके चलते बच्चों की मौत हो गई। हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि, डॉक्टर प्रवीण सोनी ने नागपुर के सीनियर डॉक्टर की सलाह को नजरअंदाज करते हुए बच्चों को कफ सिरप दिया।

किडनी फेल और हो गई मौत
बता दें कि, तमिलनाडु की दवा कंपनी 'सन फार्मा' कोल्ड्रिफ कफ सिरप बनाती थी। इसी कफ सिरप ने छिंदवाड़ा और उसके आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले 30 बच्चों की जान ले ली। इस कफ सिरप को परासिया के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रवीण सोनी ने प्रिस्क्राइब किया था। बच्चों को सर्दी-जुखाम था लेकिन इस दवा के सेवन से उनकी किडनी फेल हो गई और उनकी मौत हो गई।

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इन लोगों की हुई गिरफ्तारी
पुलिस द्वारा 5 अक्टूबर 2025 को डॉक्टर प्रवीण सोनी को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद डॉक्टर सोनी के भतीजे राजेश और मेडिकल स्टोर में फर्मिस्ट के रूप में काम करने वाले सौरभ कुमार जैन को गिरफ्तार किया गया। डॉक्टर की सोनी की पत्नी ज्योति को इस मामले में 3 नवम्बर को गिरफ्तार किया गया था क्योंकि मेडिकल स्टोर उन्हीं के नाम पर संचालित होता था।