भोपाल। मध्य प्रदेश में भाजपा संगठन के भीतर महिलाओं की भागीदारी को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। पार्टी स्तर पर भले ही महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने की बात कही जाती हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कहीं बहुत अलग है। हालिया संगठनात्मक नियुक्तियों ने इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। पार्टी हाईकमान बार-बार प्रतिनिधित्व बढ़ाने की बात जरूर करता रहा है, लेकिन प्रदेश भाजपा इकाई महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने के मामले में बहुत पीछे है।
ओबीसी मोर्चा में एक भी महिला नहीं
ताजा विवाद की वजह ओबीसी मोर्चा की नई टीम बनी है, जिसमें 36 पदाधिकारियों के बावजूद एक भी महिला को शामिल नहीं किया गया। यह स्थिति तब है, जब राज्य में ओबीसी वर्ग की आबादी काफी बड़ी मानी जाती है। ऐसे में इस मोर्चे में महिलाओं की अनुपस्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
अन्य मोर्चों में भी सीमित भागीदारी
सिर्फ ओबीसी मोर्चा ही नहीं, बल्कि अन्य मोर्चों में भी महिलाओं को उचित प्रतिनिधत्व नहीं दिया गया है। महिलाओं को सीमित अवसर दिए जाने पर चर्चा होती है, लेकिन इस पर अमल की कभी पहल नहीं की गई। अनुसूचित जाति और जनजाति मोर्चा में भी महिलाओं की संख्या अपेक्षाकृत कम है। अनुसूचित जनजाति मोर्चा ने हाल ही में 21 जिलों में केवल एक देवास में महिला को अध्यक्ष नियुक्त किया है।
दावों और हकीकत में बड़ा अंतर
पार्टी नेतृत्व द्वारा बार-बार महिलाओं को राजनीति में आगे लाने की बात कहता रहा है। पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण भी दिया गया है। इसके बाद भी संगठन के कई अहम पदों पर महिलाओं की मौजूदगी अपेक्षाकृत कम है। महिलाओं की संख्या बढ़ाने की बात की जाती हैं, लेकिन इस पर कभी ईमानदारी से अमल नहीं किया गया।
कुछ क्षेत्रों में बढ़ी है भागीदारी
हालांकि, आंकड़ों पर नजर डालें तो पूरी तस्वीर एकतरफा नहीं है। भाजपा संगठन के 62 जिलों में से 7 जिलों की कमान महिलाओं के हाथों में है, जो पहले की तुलना में एक सकारात्मक बदलाव है। इसके अलावा राज्य मंत्रिमंडल में भी कुछ महिला मंत्री भी शामिल हैं, लेकिन कुल संख्या के लिहाज से संगठन में महिलाओं की भूमिका अब भी बहुत सीमित है।
राज्य मंत्रिमंडल में कुल 5 महिलाएं
अगर सरकार और राज्य विधानसभा में महिलाओं की स्थिति की बात की जाए, तो राज्य मंत्रिमंडल के कुल 31 सदस्यों में केवल 5 महिलाएं हैं। वहीं 230 सदस्यीय राज्य विधानसभा में कुल 27 महिला विधायक हैं। पूरे प्रदेश की बात की जाए तो 230 सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल महिला विधायकों की संख्या केवल 27 है। इनमें भाजपा से 21 और कांग्रेस से 6 महिला विधायक हैं।
पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर शुरु हुआ मंथन
इस मुद्दे पर संगठन के भीतर चर्चा जारी है कि आने वाले समय में महिलाओं को ज्यादा अवसर कैसे दिए जाएं। पार्टी नेताओं का कहना है कि विस्तारित कार्यसमिति और अन्य मंचों पर महिला नेताओं को जगह देने की कोशिश की जाएगी। अब देखना यह है कि यह पहल कितनी प्रभावी साबित होती है और महिलाओं की भागीदारी वास्तव में बढ़ती है या नहीं।









