राजधानी भोपाल में शनिवार को शिक्षक महाप्रदर्शन कर रहे हैं। 'मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा' के तहत प्रदेशभर से आए हजारों शिक्षक भेल दशहरा मैदान में इकठ्ठा हुए। आयोजकों के अनुसार, 50 हजार से ज्यादा शिक्षकों ने प्रदर्शन में अपनी भागीदारी दी है। दशहरा मैदान में पंडाल लगाकर प्रदर्शन किया जा रहा है। पंडाल में शिक्षक इतने हो गए कि, कुछ शिक्षक बाहर पेड़ की छांव में बैठे नजर आए। शाम को यहां से 'मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा' निकाली जाएगी।
अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले इस प्रदर्शन का आयोजन किया जा रहा है। मोर्चा के पदाधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) देने के लिए बाध्य किया जा रहा है। यह पूरी तरह गलत है। नियुक्ति के समय जब सभी आवश्यक योग्यता पूरी की गई थी तो इस परीक्षा का क्या मतलब। यह न्यायसंगत नहीं है।
शिक्षकों का कहना है कि, 90 से 95 प्रतिशत शिक्षक सुप्रीम कोर्ट के आदेश से प्रभावित हुए हैं। इनमें से अधिकांश वे शिक्षक हैं जो अध्यापक से शिक्षक संवर्ग में शामिल हो गए हैं। इन शिक्षकों ने कम वेतन से शुरुआत की थी। अब भी पेंशन और सेवा अवधि जैसे मूल अधिकारों से संघर्ष कर रहे हैं।
संयुक्त मोर्चा ने आरोप लगाया कि, सरकार नियुक्ति दिनांक से सेवा की गणना नहीं कर रही। इसके चलते शिक्षकों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। TET अनिवार्य करने से शिक्षकों पर काफी दबाव है।
मुख्यमंत्री ने दिया था आश्वासन
बता दें कि, शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर मध्यप्रदेश सरकार ने 17 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल की है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने बीते दिनों शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था कि, मामले को सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
शिक्षकों ने किया था प्रदर्शन
शिक्षकों ने बीते दिन प्रदर्शन करते हुए मांग की थी कि, सरकार को सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर करनी चाहिए। इसे लेकर अब स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा था कि, शिक्षकों की मांगों पर सरकार गंभीर है।