भोपाल के नापतौल कार्यालय को लगातार दूसरे दिन बम से उड़ाने की धमकी, ई-मेल में ड्रोन से RDX लगाने का दावा, पुलिस अलर्ट।

Bhopal News: मध्यप्रदेश। राजधानी भोपाल स्थित नापतौल कार्यालय को लगातार दूसरे दिन फिर बम से उड़ाने की धमकी मिली है। मेल में RDX से उड़ाने की बात कही गई है। दावा किया गया है कि, ड्रोन के जरिए चार छोटे-छोटे आरडीएक्स बम लगाए गए हैं जो मंगलवार दोपहर 2 बजे फटेंगे। मेल में यह भी कह गया है कि, सभी कर्मचारियों को तुरंत कार्यालय से बाहर निकला लिया जाए।

बताया जा रहा है कि, बॉम्ब थ्रेट की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। नापतौल कार्यालय में जांच की गई। सभी कर्मचारियों को बाहर निकाला गया। हालांकि जांच करने वाले अधिकारियों का कहना है कि, उन्हें जांच में कोई भी संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। पुलिस ईमेल भेजने वाले की तलाश में जुट गई है।

RDX Bomb Threat

थ्रेट भरे ईमेल में लिखा है कि, 'भोपाल में तमिलनाडु की राजनीति को लाने के लिए माफ़ी चाहता हूं। हमारे पास कोई और चारा नहीं है, क्योंकि चेन्नई के पत्रकार DMK के गुलाम हैं। जब किसी महिला के साथ कोई जालिम बलात्कार कर रहा होता है, तो वह मदद के लिए चीखने की कोशिश करती है। पहले, वह उन लोगों का ध्यान खींचने के लिए चीखती है जो उसकी मदद कर सकते हैं, और फिर वह बलात्कारियों द्वारा पहुँचाए गए असहनीय दर्द के कारण चीखती है। अब, जब उस महिला के साथ वह जालिम बलात्कार कर रहा होता है, अगर पत्रकार और मीडियाकर्मी होने का दावा करने वाले 4 और ज़ालिम उतनी ही ज़ोर से चिल्लाने लगे, तो क्या पीड़ित की चीखें किसी को कभी सुनाई देंगी?'

'तमिलनाडु में ठीक यही हो रहा है। में तमिलनाडु में तमिल महिलाओं के साथ होने वाले हज़ारों ऐसे बलात्कारों की बात नहीं कर रहा हूँ जिनकी रिपोर्ट तक दर्ज नहीं होती। मैं तो 'माँ तमिलनाडु' के साथ हो रहे बलात्कार की बात कर रहा हूँ। मीडियाकर्मियों को पैसे देकर मीडिया की जगह पर कब्ज़ा किया जा रहा है, ताकि वे सिर्फ दो ही काम करें: 1. निकम्मी DMK सरकार की तारीफ़ करना, या 2. उदयनिधि की आलोचना को कमज़ोर करने के लिए ज़ोर-शोर से हंगामा मचाना।'

'तमिलनाडु की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था बहुत सीधी-सादी है: NGO और 'PETA' व 'Ford Foundation' जैसे अपने निजी स्वार्थों वाले संगठन विदेशी लूट के पैसे से कुछ ट्रस्टों को भारी-भरकम चंदा देते हैं: ये ट्रस्ट ही तमिलनाडु में इन संगठनों का एजेंडा आगे बढ़ाने में मदद करते हैं। जिन ट्रस्टों को सबसे ज्यादा विदेशी चंदा मिला है, वे दो हैं: 'मुरासोली ट्रस्ट' और 'DMK ट्रस्ट और इस समय, ये दोनों ही ट्रस्ट उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन के नाम पर चल रहे हैं।'

'फिर, इन अरबों-खरबों की संपत्ति वाले ट्रस्टों का इस्तेमाल वोट खरीदने, मीडिया को खरीदने, अख़बारों को खरीदने, पत्रकारों को खरीदने और यहाँ तक कि सरकारी अधिकारियों (ब्यूरोक्रेट्स) को खरीदने के लिए किया जाता है। इसलिए, अगर कोई चप्पल भी किसी ट्रस्ट को चला रही हो, तो तमिलनाडु की पूरी राजनीतिक व्यवस्था उस चप्पल (यानी उदद्यनिधि) के आगे सिर झुकाती है। इसीलिए, हम (तमिल मुक्ति संगठन) ने यह फैसला किया है कि अब हम चुनाव जैसे लोकतांत्रिक तरीकों को छोड़‌कर, गोलियों और बमों के ज़रिए माँ तमिलनाडु को साफ-सुथरा करेंगे।'