धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर आज से इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हो रही है। 98 दिनों तक चले एएसआई सर्वे की रिपोर्ट अदालत में पेश की जाएगी और पहली बार सार्वजनिक होगी। जानिए इस सुनवाई से आगे क्या बदल सकता है।

इंदौर। धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर वर्षों से जारी विवाद अब एक अहम मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। इस विवाद पर आज 16 फरवरी से महत्वपूर्ण न्यायिक सुनवाई शुरू होने जा रही है। यह विवाद लंबे समय से जारी है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ इस मामले पर विचार करेगी। यह सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा कराए गए 98 दिनों के वैज्ञानिक सर्वे की विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जाएगी। इसे सुनवाई के पहले ही दिन सबके सामने खोला जाएगा। इस रिपोर्ट को पहली बार सार्वजनिक किया जाएगा।

भोजशाला पर सालों से विवाद जारी
भोजशाला को लेकर सालों से धार्मिक और ऐतिहासिक दावों के आधार पर विवाद हो रहा है। ऐसे में एएसआई का वैज्ञानिक सर्वे इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में देखा जा रहा है। एएसआई के सर्वेक्षण के दौरान परिसर की संरचना, पुरातात्विक अवशेषों और ऐतिहासिक तथ्यों का विस्तृत अध्ययन किया गया था। अब अदालत में पेश की जाने वाली रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकता है कि स्थल की मूल प्रकृति और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि क्या रही है।

शीर्ष कोर्ट के निर्देश पर हो रही सुनवाई
यह सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर की जा रही है। शीर्ष अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इस मामले को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ को सौंपा था। इंदौर हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी शामिल हैं, इस प्रकरण की सुनवाई करेंगी। कोर्ट की सूची में यह मामला क्रमांक 62 पर दर्ज है। पहले दिन ही ASI की रिपोर्ट को खोले जाने से दोनों पक्षों की दलीलों को नया आधार मिल सकता है। 

रिपोर्ट के निष्कर्षों से तय होगी आगे की दिशा
रिपोर्ट में दर्ज निष्कर्ष आगे की न्यायिक प्रक्रिया की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। चूंकि यह रिपोर्ट अब तक गोपनीय थी, इसलिए इसके सार्वजनिक होने को लेकर सभी पक्षों में उत्सुकता बनी हुई है। कुल मिलाकर, आज से शुरू हो रही यह सुनवाई भोजशाला विवाद के भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। अदालत की कार्यवाही और एएसआई की रिपोर्ट के निष्कर्षों पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि यही दस्तावेज आने वाले समय में न्यायिक निर्णय का आधार बन सकता है।