मध्य प्रदेश में बुजुर्गों के लिए नई स्वास्थ्य पहल शुरू की गई है। अब आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर बुजुर्गों की नियमित जांच करेंगी और उनकी समुचित देखभाल करेंगी। जानें कैसे पूरी तरह से बदल जाएंगी प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं।

भोपाल। मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने वरिष्ठ नागरिकों की बेहतर देखभाल के लिए एक नई और अहम व्यवस्था लागू की है। इस पहल के तहत अब आशा कार्यकर्ता केवल सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि वे घर-घर जाकर बुजुर्गों की नियमित निगरानी करेंगी। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उम्रदराज लोगों को समय पर स्वास्थ्य सहायता और सही मार्गदर्शन मिल सके, जिससे उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान नहीं होना पड़े।

आशा कार्यकर्ताओं को दिया जा रहा प्रशिक्षण
इस नई जिम्मेदारी को संभालने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस व्यवस्था में आशा कार्यकर्ताओं को खास प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसे पेलिएटिव केयर कहा जाता है। यह प्रशिक्षण उन्हें गंभीर और लंबे समय से बीमार लोगों की देखभाल के लिए सक्षम बनाता है। इससे वे मरीजों की स्थिति को ठीक तरह से समझकर सही सलाह दे सकेंगी और जरूरत पड़ने पर प्राथमिक उपचार भी दे पाएंगी।

 बुजुर्गों को घर पर मिलेगी स्वास्थ्य सहायता
इस योजना के लागू होने से अब बुजुर्गों को छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए बार-बार अस्पताल जाने की जरूरत कम होगी। आशा कार्यकर्ता घर पर ही उनकी जांच करेंगी और समस्याओं का शुरुआती स्तर पर समाधान करने की कोशिश करेंगी। वे सांस लेने में परेशानी, दर्द, उल्टी, दस्त, घाव या बेडसोर जैसी समस्याओं पर ध्यान देंगी। साथ ही परिवार के सदस्यों को यह भी सिखाएंगी कि मरीज की सही देखभाल कैसे की जाए और दवाइयों का उपयोग किस तरह से करना चाहिए।

अकेले रहने वाले बुजुर्गों को मिलेगा विशेष लाभ
इस पहल से अकेले और ग्रामीण या दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बुजुर्गों को विशेष लाभ मिलेगा, जिन्हें स्वास्थ्य सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाती हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, आशा कार्यकर्ता पहले से ही समुदाय और स्वास्थ्य विभाग के बीच एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं। अब उनकी जिम्मेदारियां और बढ़ा दी गई हैं, ताकि वे बुजुर्गों को शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्तर पर सहयोग दे सकें। इस योजना से न केवल मरीजों को राहत मिलेगी, बल्कि उनके परिवारों को भी सहारा मिलेगा। इससे बुजुर्गों की जीवन गुणवत्ता में भी सुधार होगा।