हरियाणा के सोनीपत जिले में पंचायती राज व्यवस्था में पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित करने की दिशा में प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। ग्राम पंचायत शाहजादपुर में सरकारी धन के दुरुपयोग और फर्जीवाड़े के गंभीर मामले में जिला उपायुक्त ने बड़ी कार्रवाई कर वर्तमान सरपंच को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया है। जांच में यह पाया गया कि सरपंच ने कागजों में हेरफेर कर लाखों रुपये की राशि का गबन किया और प्रशासन को गुमराह करने के लिए जाली साक्ष्य प्रस्तुत किए।
हरियाणा पंचायती राज अधिनियम के तहत गिरी गाज
सोनीपत के उपायुक्त सुशील सरवान ने शाहजादपुर के सरपंच दीपक शर्मा को हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 51(3)(e) के अंतर्गत दोषी पाते हुए बर्खास्तगी के आदेश जारी किए हैं। इस आदेश के लागू होते ही दीपक शर्मा के पास मौजूद सभी प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां समाप्त हो गई हैं। अब वे सरपंच के तौर पर किसी भी सरकारी कार्य या विशेषाधिकार का प्रयोग नहीं कर पाएंगे। प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।
सोलर लाइट मरम्मत के नाम पर बड़ा खेल
पूरे घोटाले की जड़ ग्राम पंचायत के खाते से निकाली गई 4,63,680 रुपये की वह राशि है, जिसे 92 सोलर स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत के नाम पर खर्च दिखाया गया था। जांच टीमों ने जब धरातल पर जाकर भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया, तो सच्चाई कुछ और ही निकली। मौके पर केवल 48 लाइटें ही कार्यशील अवस्था में मिलीं। कई लाइटें तो अपने स्थान से गायब थीं और उन्हें मरम्मत के बाद दोबारा लगाया ही नहीं गया था। रिकॉर्ड में सभी 92 लाइटों को ठीक दिखाकर सरकारी खजाने को सीधा चूना लगाया गया।
तकनीकी नियमों की अनदेखी और सीधे भुगतान की साजिश
जांच रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। नियमानुसार किसी भी विकास कार्य या मरम्मत के भुगतान से पहले जूनियर इंजीनियर (JE) या सब-डिविजनल इंजीनियर (SDE) से तकनीकी सत्यापन (Technical Verification) कराना अनिवार्य होता है। लेकिन सरपंच दीपक शर्मा ने किसी भी अधिकारी से कार्य की गुणवत्ता की जांच कराए बिना ही संबंधित निजी फर्म को सीधे भुगतान जारी कर दिया। न तो इस कार्य के लिए कोई प्रशासनिक मंजूरी ली गई और न ही तकनीकी मापदंडों का पालन किया गया।
गुमराह करने के लिए पेश किए सोनीपत शहर के फर्जी फोटो
इस मामले में जालसाजी का स्तर तब सामने आया जब सरपंच द्वारा पेश किए गए सबूतों की डिजिटल जांच हुई। सरपंच ने लाइटें ठीक होने के प्रमाण के तौर पर जीपीएस टैग (GPS Tagged) वाली तस्वीरें प्रशासन को सौंपी थीं। जब इन तस्वीरों के कोऑर्डिनेट्स (Coordinates) चेक किए गए, तो पता चला कि ये फोटो शाहजादपुर गांव की नहीं, बल्कि सोनीपत शहर की राजीव गांधी कॉलोनी की थीं। साक्ष्यों के साथ इस तरह की छेड़छाड़ को प्रशासन ने जांच को प्रभावित करने और धोखाधड़ी करने की गंभीर कोशिश माना।
हाईकोर्ट के दखल के बाद बढ़ी जांच की रफ्तार
यह मामला काफी समय से चर्चा में था और अंततः पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इसमें नियमित जांच के आदेश दिए गए थे। जिला परिषद के सीईओ और अतिरिक्त उपायुक्त की विस्तृत जांच रिपोर्ट में सरपंच के खिलाफ लगे सभी आरोपों की पुष्टि हुई। सरपंच द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण और ग्रामीणों के पक्ष में दिए गए हलफनामों को प्रशासन ने 'स्वार्थपूर्ण' और 'असंतोषजनक' करार देते हुए खारिज कर दिया।
वसूली के साथ-साथ अब होगी जेल की तैयारी
उपायुक्त ने न केवल सरपंच को बर्खास्त किया है, बल्कि गबन की गई पूरी राशि 4.63 लाख रुपये को ब्याज सहित वसूलने के आदेश भी दिए हैं। खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (BDPO) को निर्देशित किया गया है कि वे संबंधित पुलिस थाने में आरोपी सरपंच के खिलाफ आपराधिक मामला (FIR) दर्ज करवाएं। इसके अतिरिक्त, एसडीएम (सिविल) को 30 दिनों के भीतर वित्तीय नुकसान का विस्तृत आकलन (Loss Assessment) कर रिपोर्ट देने को कहा गया है, ताकि वसूली की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा सके।
रिकॉर्ड सौंपने के निर्देश, पंचायत में वैकल्पिक व्यवस्था
बर्खास्त सरपंच दीपक शर्मा को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे पंचायत से संबंधित समस्त सरकारी दस्तावेज, मुहर, कैशबुक और अन्य संपत्तियां तुरंत बीडीपीओ या पंचायत के बहुमत वाले पंच को सौंप दें। गांव के विकास कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश भी जारी कर दिए हैं।
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