रामपाल को अब हर पेशी पर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होना होगा। 2014 के बरवाला हिंसा कांड और हत्या के मामलों में सजा काट रहे रामपाल पर प्रशासन की कड़ी नजर रहेगी।

रिहाई के बाद रामपाल अब सोनीपत जिले के धनाना स्थित सतलोक आश्रम में परिवार के साथ निवास करेंगे। कोर्ट ने उनकी जमानत की अवधि के दौरान सख्त प्रोटोकॉल लागू किया है। रामपाल के वकील सचिन दास ने बताया कि अदालत ने निर्देश दिया है कि जमानत के समय वह केवल अपने निर्धारित पते (धनाना आश्रम) पर ही रहेंगे। सबसे महत्वपूर्ण पाबंदी यह है कि रामपाल इस दौरान किसी भी तरह का सार्वजनिक सत्संग या धार्मिक प्रवचन नहीं कर पाएंगे। 

अदालत ने उन्हें हर सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया है। उनकी अगली पेशी 16 मई को है। 

जमानत मिलने के बाद भी जेल में डटे रहे भक्त 
इस रिहाई के साथ एक बेहद हैरान करने वाला तथ्य भी सामने आया है। रामपाल के साथ उनके दो परम अनुयायी, बबीता और मनोज भी जेल से बाहर आए। चौंकाने वाली बात यह है कि मनोज को 2016 में और बबीता को 2021 में ही जमानत मिल गई थी। इसके बावजूद दोनों ने जेल से बाहर आने से इनकार कर दिया था। उनका तर्क था कि वे रामपाल की सेवा के लिए जेल के भीतर ही रहेंगे और तभी बाहर निकलेंगे जब उनके गुरु को जमानत मिलेगी। 
शुक्रवार को जब रामपाल ने हत्या के मामलों में 5-5 लाख रुपये के बेल बॉन्ड भरे, तभी इन दोनों भक्तों के लिए भी एक-एक लाख रुपये के मुचलके जमा किए गए। बबीता जो रामपाल के मुख्य सहयोगी बलजीत की बेटी हैं, उन्हें 2014 के बरवाला कांड के दौरान गिरफ्तार किया गया था। 

धनाना आश्रम, 12 एकड़ में फैला नया मुख्यालय 
रामपाल के भतीजे युद्धवीर ने मीडिया से बातचीत में बताया कि वर्तमान में हरियाणा का धनाना आश्रम उनका सबसे बड़ा केंद्र है। यह आश्रम 12 एकड़ लंबाई और 3 एकड़ चौड़ाई में फैला हुआ है, जिसमें एक लाख श्रद्धालुओं के बैठने और भोजन की व्यवस्था है। युद्धवीर के अनुसार गुरुजी अभी कुछ दिन यहां विश्राम करेंगे और भविष्य में देश के अन्य 22 आश्रमों का दौरा भी कर सकते हैं, बशर्ते अदालत की शर्तें इसकी अनुमति दें। 

2014 में हुई थी गिरफ्तारी
रामपाल का विवाद नवंबर 2014 में तब शुरू हुआ जब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उन्हें अवमानना के मामले में पेश होने का आदेश दिया। रामपाल के पेश न होने पर पुलिस ने हिसार के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम की घेराबंदी की। 
19 नवंबर 2014 को पुलिस और समर्थकों के बीच हुए भीषण टकराव में 6 लोगों की जान चली गई थी। इस हिंसा के बाद रामपाल को गिरफ्तार किया गया, 2018 में हिसार की एक अदालत ने उन्हें हत्या और अन्य अपराधों का दोषी मानकर उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही उन पर देशद्रोह का मुकदमा भी दर्ज किया गया था। लंबे कानूनी संघर्ष के बाद 8 अप्रैल को हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दी, जिसके आधार पर अब उनकी रिहाई हुई है। 

अदालत ने ये 4 शर्तें रखीं हैं 
1. निवास स्थान : जमानत अवधि के दौरान रामपाल को सोनीपत के धनाना आश्रम में ही रहना होगा।
2. सत्संग पर प्रतिबंध : वह किसी भी प्रकार का धार्मिक या सार्वजनिक सत्संग नहीं कर सकेंगे।
3. कोर्ट में उपस्थिति : प्रत्येक पेशी पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत के सामने हाजिर होना होगा। 
4. अनुशासन : किसी भी नियम का उल्लंघन होने पर जमानत तुरंत रद्द की जा सकती है।
फिलहाल, रामपाल की रिहाई के बाद उनके अनुयायियों में खुशी का माहौल है, लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्कता बढ़ा दी है।