आरोप लगाया गया है कि कथावाचक लाखों रुपए लेकर ये कथाएं सुनाते हैं, जबकि इनका हकीकत से कोई वास्ता नहीं है और धार्मिक टिप्पणियों के अलावा अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी अपनी राय रखी।

कुरुक्षेत्र के पूर्व सांसद और लोकतंत्र सुरक्षा मंच के संरक्षक राजकुमार सैनी एक बार फिर अपने तीखे और विवादित बयानों के कारण चर्चा में हैं। रविवार को फरीदाबाद के होटल मैगपाई पहुंचे सैनी ने धार्मिक मान्यताओं और रामायण को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिससे सियासी और धार्मिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है।

धार्मिक कथाओं को बताया 'मानसिक गुलामी' का जरिया
सैनी समाज के लोगों द्वारा आगामी 4 अप्रैल को आयोजित होने वाले सम्राट अशोक जयंती कार्यक्रम का न्यौता लेने पहुंचे राजकुमार सैनी ने कहा कि समाज के लोगों को जानबूझकर काल्पनिक कहानियों में उलझाकर रखा गया है। उन्होंने कहा कि धार्मिक कथाएं और संत-महात्मा लोगों को असल मुद्दों से भटकाकर उन्हें 'मानसिक रूप से गुलाम' बना रहे हैं।सैनी ने आरोप लगाया कि कथावाचक लाखों रुपए लेकर ये कथाएं सुनाते हैं, जबकि इनका हकीकत से कोई वास्ता नहीं है।

रामायण और रावण पर टिप्पणी
राजकुमार सैनी ने रामायण को पूरी तरह काल्पनिक करार देते हुए कहा कि 10 सिरों वाले रावण का कोई अस्तित्व ही नहीं था। उन्होंने अपनी बात के समर्थन में पेरियार ई.वी. रामासामी और ललई सिंह यादव की पुस्तकों का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि असली रामायण वही है जिसे पेरियार ने प्रचारित किया था और इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट का 1976 का एक फैसला भी मौजूद है।

"महापुरुषों को पढ़ने से मिलेगा हक"
पूर्व सांसद ने समाज से अपील की कि वे काल्पनिक कहानियों के बजाय सम्राट अशोक, गौतम बुद्ध, ज्योतिबा फुले और डॉ. बी.आर. अंबेडकर जैसे महापुरुषों को पढ़ें। उन्होंने आरोप लगाया कि जब तक लोग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होंगे, तब तक केंद्र और राज्य की नौकरियों में उनके साथ भेदभाव होता रहेगा।

वैश्विक मुद्दों और महंगाई पर घेरा
धार्मिक टिप्पणियों के अलावा सैनी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने ईरान-इजरायल तनाव का जिक्र करते हुए कहा कि आज छोटे देश भी महाशक्तियों को चुनौती दे रहे हैं। साथ ही उन्होंने भारत सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि युद्ध के कारण बढ़ रही गैस की किल्लत और महंगाई को कम करने के लिए सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है।

पुराना विवादों से नाता
गौरतलब है कि राजकुमार सैनी पहले भी अपने बयानों के कारण विवादों में रहे हैं। 2015-16 के जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान उनके बयानों ने काफी तूल पकड़ा था, जिसके बाद उनके घर पर हमला भी हुआ था और भाजपा ने उन्हें नोटिस जारी किया था। 2014 में कुरुक्षेत्र से नवीन जिंदल को हराकर सांसद बने सैनी अब ओबीसी वर्ग की राजनीति के जरिए अपनी अलग जमीन तलाश रहे हैं।

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