हरियाणा के पानीपत जिले के खौफनाक हत्याकांड ने 5 साल पहले पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया था। न्यायाधीश आरके मेहता की अदालत ने अपनी पत्नी, साली और सास की निर्मम हत्या करने वाले अपराधी नूरहसन उर्फ राजू को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। अदालत ने इस मामले को समाज के लिए बेहद जघन्य और क्रूर माना है।
तीन कत्ल और जुर्म की भारी सजा
अदालत ने नूरहसन को ताउम्र जेल की सजा सुनाने के साथ-साथ 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इसके अतिरिक्त सबूत मिटाने की धारा 201 के तहत उसे 3 साल की जेल और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई है। इस सजा के साथ ही उन तीन मासूम जिंदगियों को न्याय मिला है, जिन्हें नूरहसन ने अपनी सनक की भेंट चढ़ा दिया था।
शक की आग ने बनाया हत्यारा
जुर्म की यह दास्तां सितंबर 2020 में शुरू हुई थी। चुलकाना गांव का निवासी नूरहसन समालखा में एक किराए के मकान में रहता था। पुलिस तफ्तीश में यह बात सामने आई कि नूरहसन को अपनी पत्नी मधु के चरित्र पर संदेह था, जिसे लेकर घर में अक्सर झगड़ा होता था, 4 सितंबर को इसी बात पर विवाद इतना बढ़ा कि उसकी साली मनीषा ने पुलिस में शिकायत करने की चेतावनी दे दी। बस इसी बात ने नूरहसन के भीतर बदले की ऐसी आग सुलगाई कि उसने पूरे परिवार को खत्म करने का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया।
नींद की गोलियां, कुल्हाड़ी और दरिंदगी
5 सितंबर 2020 की काली रात को नूरहसन ने अपनी खौफनाक योजना को अंजाम दिया। उसने अपनी पत्नी मधु और साली मनीषा को कोल्ड ड्रिंक (पेप्सी) में नींद की गोलियां मिलाकर पिला दीं। जब दोनों गहरी नींद में सो गईं, तो आरोपी ने कुल्हाड़ी से वार कर दोनों को मौत के घाट उतार दिया। आरोपी की दरिंदगी यहीं नहीं रुकी। कत्ल के बाद उसने साक्ष्य नष्ट करने के लिए पत्नी के शव को रेलवे लाइन के पास ले जाकर जला दिया। वहीं, अपनी साली के शव के साथ कुकृत्य करने के बाद उसे एक गंदे नाले में फेंक दिया।
सास को भी नहीं बख्शा
दो कत्ल करने के बाद भी नूरहसन का मन नहीं भरा। जब उसकी सास जमीला ने अपनी बेटियों के अचानक गायब होने पर सवाल पूछे, तो उसने उन्हें भी रास्ते से हटाने का फैसला किया। 8 सितंबर 2020 की रात वह अपनी सास को बातचीत के बहाने बाइक पर बैठाकर ले गया और सुनसान जगह पर गला दबाकर उनकी हत्या कर दी। उसने अपनी सास के शव के साथ भी दरिंदगी की और पहचान मिटाने के लिए पेट्रोल छिड़ककर शव को आग के हवाले कर दिया।
पुलिस की मुस्तैदी और कोर्ट का फैसला
जीआरपी थाना पानीपत पुलिस ने इस गुत्थी को सुलझाने के लिए कड़ी मेहनत की। पुलिस ने घटनास्थल से खून से सना तकिया, वारदात में इस्तेमाल कुल्हाड़ी और अन्य फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाए। कोर्ट में पेश किए गए इन पुख्ता सबूतों और प्रभावी पैरवी के चलते नूरहसन का बच पाना नामुमकिन हो गया। 5 साल के लंबे इंतजार के बाद अब वह सलाखों के पीछे अपनी आखिरी सांस तक सड़ेगा।