इस पैसे का इस्तेमाल शेयर मार्केट और प्रॉपर्टी खरीदने में किया गया। इस मामले में ईडी  द्वारा 19 ठिकानों पर छापेमारी की गई।

हरियाणा में भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सरकार ने अब तक का सबसे सख्त कदम उठाया है। आईडीएफसी बैंक में हुए 590 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो  करने जा रही है। राज्य सरकार ने इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर औपचारिक सिफारिश भेज दी है। इस फैसले के बाद से हरियाणा के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि अब कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारी जांच एजेंसी के रडार पर हैं।

एफडी के नाम पर खेल
यह पूरा मामला सरकारी धन को फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने से जुड़ा है। हरियाणा सरकार की विभिन्न एजेंसियों ने लगभग 590 करोड़ रुपये आईडीएफसी बैंक में जमा कराए थे। नियमों के मुताबिक, इस राशि की एफडी बनाई जानी थी, लेकिन बैंक अधिकारियों ने मिलीभगत कर इस भारी-भरकम राशि को शेल कंपनियों और निजी खातों में डायवर्ट कर दिया।इस पैसे का इस्तेमाल शेयर मार्केट और प्रॉपर्टी खरीदने में किया गया। हालांकि, सरकार की सख्ती के बाद पूरे 590 करोड़ रुपये वापस आ चुके हैं, लेकिन साजिश की गहराई को देखते हुए सीएम ने मामले को सीबीआई को सौंपने का निर्णय लिया।

इन दिग्गजों पर गिरी गाज, अब 'बड़े मगरमच्छों' की बारी
हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो इस मामले में पहले ही कई गिरफ्तारियां कर चुकी है:

  • बैंक अधिकारी: मास्टरमाइंड रिभव ऋषि (पूर्व मैनेजर) और रिलेशनशिप मैनेजर अभय गिरफ्तार।
  • सरकारी अफसर: राजेश सांगवान (नियंत्रक वित्त एवं लेखा, मार्केटिंग बोर्ड) और रणधीर सिंह (नियंत्रक वित्त एवं लेखा, शिक्षा परियोजना परिषद) को जेल भेजा जा चुका है।
  • ज्वेलर्स की भूमिका: सावन ज्वेलर्स के मालिक राजन और अंकुर शर्मा को भी कैश कन्वर्जन और कमीशन खोरी के आरोप में पकड़ा गया है।

अब रडार पर कौन? 
सूत्रों के मुताबिक, ईडी  द्वारा 19 ठिकानों पर की गई छापेमारी के बाद आधा दर्जन से अधिक वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। सीबीआई की एंट्री के बाद इन बड़े चेहरों पर शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।

स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स का कनेक्शन
जांच में सामने आया कि आरोपी मैनेजर अभय की पत्नी स्वाति सिंगला ने 'स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स' नाम से एक कंपनी बनाई थी। सरकारी फंड का बड़ा हिस्सा इसी कंपनी के जरिए डायवर्ट किया गया। इस खेल में बैंक कर्मियों, ज्वैलर्स और वित्त विभाग के अधिकारियों ने मिलकर एक नेक्सस (गठजोड़) बना लिया था, जो सरकारी निर्देशों का उल्लंघन कर रिश्वत की मोटी रकम डकार रहा था।

मुख्यमंत्री का सख्त संदेश
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट कर दिया है कि जनता के पैसे के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना ही बड़ा अधिकारी क्यों न हो। एसीबी की जांच में '7 पीसी एक्ट' (भ्रष्टाचार निरोधक कानून) की धाराएं भी जोड़ी गई हैं।

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