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इस मामले को लेकर रजिस्ट्रार ने चुनाव अधिकारी को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर जवाब तलब किया है। 

हरियाणा की प्रतिष्ठित जाट शिक्षण संस्था के आगामी चुनावों को लेकर एक बार फिर कानूनी और प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है। 2020 की पुरानी वोटर लिस्ट के आधार पर चुनाव कराने की प्रक्रिया पर जिला रजिस्ट्रार ने कड़ी आपत्ति जताई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए रजिस्ट्रार ने चुनाव अधिकारी को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर जवाब तलब किया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच आज संस्था के पदाधिकारियों ने रणनीति स्पष्ट करने के लिए प्रेस वार्ता बुलाई है।

विवाद की मुख्य वजह: नई सदस्यता को दरकिनार करना?
चुनावों को लेकर मुख्य आपत्ति एडवोकेट योगेश सिहाग द्वारा दर्ज कराई गई याचिका के बाद शुरू हुई। आरोप है कि:

  • पुरानी लिस्ट का इस्तेमाल: चुनाव अधिकारी 2020 की वोटर लिस्ट को आधार बनाकर 12 अप्रैल को चुनाव कराना चाहते हैं।
  • नए सदस्यों की अनदेखी: 2020 के बाद संस्था से कई नए सदस्य जुड़े हैं, जिन्हें इस लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है।
  • पारदर्शिता पर सवाल: याचिकाकर्ता का तर्क है कि पुराने डेटा के आधार पर चुनाव कराना नियमों के खिलाफ है और इससे चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित होगी।

रजिस्ट्रार का कड़ा रुख
जिला रजिस्ट्रार ने चुनाव अधिकारी को भेजे नोटिस में सदस्य संख्या, कॉलेज प्रतिनिधियों और वोटिंग अधिकारों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। संस्था के नियमों के अनुसार, हर तीन साल में चुनाव होते हैं और मतदाता सूची को अपडेट करना अनिवार्य होता है।

संस्था का रसूख और चुनावी गणित
सेठ छाजूराम द्वारा स्थापित इस संस्था के अधीन 4 प्रमुख कॉलेज और स्कूल संचालित हैं, जिनमें लगभग 14,605 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।वर्तमान सूची के अनुसार605 वोटर हैं (296 कॉलेजियम मेंबर और 12 कॉलेजों के प्रतिनिधि)।संस्था के सदस्य हिसार के अलावा हांसी, सिरसा, फतेहाबाद, जींद और रोहतक जिलों तक फैले हुए हैं।पहले की घोषणा के अनुसार 26 और 27 मार्च से नामांकन शुरू होने थे, जिन पर अब संशय के बादल मंडरा रहे हैं।

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