हरियाणा की सियासत में सोमवार का दिन किसी सस्पेंस फिल्म से कम नहीं रहा। राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए दंगल में भारतीय जनता पार्टी के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध ने जीत का परचम लहराया है। हालांकि, यह जीत जितनी सीधी दिख रही है, उतनी थी नहीं। वोटों के गणित और क्रॉस वोटिंग के जाल में फंसी यह चुनावी जंग आधी रात तक चली, जिसमें कांग्रेस ने अपने एक विधायक का वोट रद्द होने और पांच विधायकों की क्रॉस वोटिंग के बावजूद जीत हासिल कर ली।
हार और जीत के बीच की महीन लकीर
इस चुनाव में सबसे चौंकाने वाला रहा जीत का अंतर। कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध और भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी सतीश नांदल के बीच मुकाबला इतना कड़ा था कि हार-जीत का फैसला एक वोट से भी कम के अंतर से हुआ।
वोट वैल्यू के तकनीकी फार्मूले के अनुसार सतीश नांदल को 27.34 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध 28 वोट हासिल करने में सफल रहे। मात्र 0.66 वोट वैल्यू के अंतर ने नांदल की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। यदि भाजपा का एक वोट रद्द न होता या इनेलो के दो विधायक मतदान में हिस्सा लेते, तो परिणाम की तस्वीर पूरी तरह पलट सकती थी।
ऐसे हुआ वोटों का बंटवारा
हरियाणा विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं, लेकिन सदन के समीकरणों ने अंतिम समय में सबको उलझा दिया।
• गैर-हाजिर : इनेलो (INLD) के 2 विधायकों ने वोटिंग प्रक्रिया से खुद को दूर रखा।
• रद्द वोट : कुल 5 वोट अमान्य घोषित किए गए (4 कांग्रेस के और 1 भाजपा का)।
• वैध मत : कुल 83 वोटों को गिनती के योग्य पाया गया।
क्रॉस वोटिंग कांग्रेस की अंदरूनी कलह
कांग्रेस के लिए यह जीत 'जश्न से ज्यादा आत्मचिंतन' का विषय है। पार्टी के 37 विधायक थे, लेकिन चुनाव के दौरान 5 विधायकों ने पाला बदलकर निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के पक्ष में क्रॉस वोटिंग कर दी। इसके अलावा कांग्रेस के 4 वोट रद्द भी हुए। कुल मिलाकर कांग्रेस ने 9 वोटों का नुकसान उठाया। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इसे 'अग्नि परीक्षा' बताते हुए कहा कि क्रॉस वोटिंग करने वालों को जनता सबक सिखाएगी, लेकिन पार्टी आलाकमान को इसका जवाब देना अब हुड्डा गुट के लिए बड़ी चुनौती होगी।
रात भर चला हाई-वोल्टेज ड्रामा
वोटों की गिनती शाम 5 बजे शुरू होनी थी, लेकिन शिकायतों के अंबार ने इसे रात 10:25 बजे तक खींच दिया।
1. गोपनीयता का उल्लंघन: भाजपा ने कांग्रेस विधायक परमवीर सिंह और भरत सिंह बेनीवाल पर वोट दिखाने का आरोप लगाया।
2. जवाबी हमला: कांग्रेस ने भी पलटवार करते हुए कैबिनेट मंत्री अनिल विज के वोट पर आपत्ति जताई।
3. चुनाव आयोग का फैसला: केंद्रीय चुनाव आयोग ने दखल देते हुए परमवीर सिंह का वोट रद्द कर दिया, जबकि बेनीवाल और विज के वोट वैध माने गए।
इसलिए जीते बौद्ध...
कांग्रेस ने इस बार बेहद सधी हुई रणनीति अपनाई थी। राहुल गांधी की पसंद पर कर्मवीर बौद्ध को उम्मीदवार बनाया गया, जो किसी भी स्थानीय गुट (हुड्डा या सैलजा) से सीधे तौर पर नहीं जुड़े थे। अनुसूचित जाति (SC) से आने वाले बौद्ध को उतारकर कांग्रेस ने अपने कोर वोट बैंक को संदेश देने की कोशिश की। इसके अलावा, विधायकों की 'बाड़ाबंदी' और उन्हें एकजुट रखने के लिए हिमाचल भेजना भी कारगर साबित हुआ।
दूसरी ओर, भाजपा ने 2016 और 2022 के अपने सफल 'निर्दलीय प्रयोग' को दोहराने की कोशिश की थी, लेकिन भाजपा का अपना एक वोट रद्द होना और इनेलो की तटस्थता उनके लिए आत्मघाती साबित हुई।
इनेलो के दो विधायकों का वोट न डालना रहा टर्निंग प्वाइंट
इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के दो विधायकों का वोट न डालना इस चुनाव का टर्निंग प्वाइंट रहा। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इनेलो किसी भी खेमे (भाजपा या कांग्रेस) का साथ देकर 'बी टीम' कहलाने का ठप्पा नहीं लगवाना चाहती थी। जाट वोट बैंक की नाराजगी के डर और हॉर्स ट्रेडिंग के आरोपों से बचने के लिए उन्होंने मैदान से बाहर रहना ही बेहतर समझा।
5 राज्यसभा सीटों में से 4 पर भाजपा का कब्जा
इस परिणाम के बाद हरियाणा की 5 राज्यसभा सीटों में से 4 पर भाजपा (संजय भाटिया, रेखा शर्मा, सुभाष बराला और समर्थित कार्तिकेय शर्मा) का कब्जा है, जबकि 1 सीट पर अब कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध काबिज हो गए हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि उनके 25% विधायक अब उनके साथ नहीं रहे, जो राज्य की भविष्य की राजनीति के लिए बड़े संकेत हैं।
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