सरकार 27 अप्रैल को बिल पेश करेगी, जिससे कॉमन कैडर के ग्रुप-D कर्मचारियों के प्रमोशन का रास्ता साफ होगा। नए बिल के तहत 5 साल की सेवा पूरी करने वाले ग्रुप-D कर्मचारी क्लर्क पद के लिए पात्र होंगे।

हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार ने प्रदेश के ग्रुप-D कर्मचारियों को एक बड़ी सौगात देने की तैयारी कर ली है। सोमवार को गुरुग्राम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सरकार ने 27 अप्रैल को विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाने का फैसला किया है, जिसमें कर्मचारियों के हितों से जुड़ा 'हरियाणा क्लेरिकल सर्विस बिल-2026' पेश किया जाएगा। इसके साथ ही बीजेपी इस सत्र में महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी लाएगी।

ग्रुप-D कर्मचारियों के प्रमोशन कोटा में वृद्धि 
कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि 'हरियाणा क्लेरिकल सर्विसेज रिक्रूटमेंट एंड कंडीशंस ऑफ सर्विस बिल-2026' के मसौदे को मंजूरी मिल गई है। इस नए कानून के लागू होने के बाद कॉमन कैडर के उन ग्रुप-D कर्मचारियों के लिए तरक्की के रास्ते खुल जाएंगे, जिन्होंने अपनी सेवा के 5 वर्ष पूरे कर लिए हैं। 

सरकार ने इस बिल से ग्रुप-D से क्लर्क पद पर पदोन्नति (प्रमोशन) के कोटे को भी बढ़ाने का निर्णय लिया है। वर्तमान में यह कोटा 20% है, जिसे बढ़ाकर अब 30% करने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा नियमों में एक और महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए 5% पद 'एक्स-ग्रेशिया' (अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति) के लिए सुरक्षित रखना अनिवार्य कर दिया गया है। 

विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव 
विधानसभा सत्र के दौरान सत्तापक्ष केवल विधायी कार्य ही नहीं करेगा बल्कि राजनीतिक मोर्चे पर भी घेराबंदी करेगा। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि बीजेपी विपक्ष के खिलाफ 'नारी शक्ति वंदन' विधेयक के विरोध को लेकर निंदा प्रस्ताव लाएगी। नायब सैनी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस बिल का विरोध कर महिलाओं के सम्मान और उनकी आकांक्षाओं को गहरी चोट पहुंचाई है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसा ऐतिहासिक अभियान हरियाणा की धरती से शुरू किया था। आज जब महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं, तब विपक्ष ने अपना असली चेहरा दिखा दिया है। 

संविधान संशोधन बिल और परिसीमन का विवाद
गौरतलब है कि हाल ही में लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने के उद्देश्य से 131वां संविधान संशोधन बिल लाया गया था। मतदान के दौरान सदन में मौजूद 528 सांसदों में से 298 ने पक्ष में और 230 ने विपक्ष में वोट किया। हालांकि, बिल को पारित होने के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी, जिसके अभाव में यह बिल मात्र 54 वोटों से गिर गया।

परिसीमन के मुद्दे पर भ्रम फैलाने के आरोपों पर सीएम ने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री ने पहले ही साफ कर दिया है कि किसी भी राज्य का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा। विपक्ष केवल वोट बैंक की राजनीति के लिए झूठ फैला रहा है। 

हुड्डा ने पलटवार कर कहा- बीजेपी की नीयत में खोट 
सरकार के इन दावों पर पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। हुड्डा ने कहा कि महिला आरक्षण का विचार सबसे पहले कांग्रेस ही लेकर आई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने 2023 में पारित हुए बिल को जानबूझकर पेचीदा बना दिया है। 

हुड्डा ने तंज कसते हुए कहा कि अगर बीजेपी की मंशा साफ होती तो यह आरक्षण 2024 के चुनावों में ही लागू हो जाना चाहिए था। परिसीमन और अन्य शर्तों को जोड़कर केवल इस मुद्दे को उलझाने का प्रयास किया जा रहा है। 

विशेष सत्र की रणनीति 
27 अप्रैल को होने वाले इस सत्र के काफी हंगामेदार रहने के आसार हैं। एक ओर जहां सरकार ग्रुप-D कर्मचारियों के प्रमोशन कार्ड के जरिए कर्मचारियों को साधने की कोशिश करेगी, वहीं दूसरी ओर 'नारी शक्ति' के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने की रणनीति तैयार है। कैबिनेट के इन फैसलों से साफ है कि सरकार आगामी चुनावी चुनौतियों को देखते हुए हर वर्ग को संतुष्ट करने और विपक्ष को कटघरे में खड़ा करने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती।
 
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