गुरुग्राम में सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शन के पीछे एक बेहद खतरनाक साजिश रची गई है। वॉट्सएप चैट के ज़रिए खुलासा हुआ, जिसमें 6 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है,इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण रास्ता अपनाने की अपील की।

Gurugram Horror Conspiracy: हरियाणा के औद्योगिक केंद्र मानेसर में सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के पीछे एक बेहद खतरनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ है। गुरुग्राम पुलिस ने जांच में पाया है कि प्रदर्शन की आड़ में बाहरी तत्वों ने कंपनियों और वाहनों को पेट्रोल बम से जलाने की योजना बनाई थी। पुलिस ने इस मामले में 6 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान वॉट्सएप चैट के जरिए हुई है।

बाहरी लोगों ने रची आगजनी और हिंसा की साजिश
पुलिस के अनुसार, 9 अप्रैल को मानेसर में विभिन्न कंपनियों के कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। जांच के दौरान पुलिस के हाथ कुछ ऐसे वॉट्सएप चैट और स्क्रीनशॉट लगे, जिनसे खुलासा हुआ कि यह केवल एक साधारण प्रदर्शन नहीं था। गिरफ्तार किए गए आरोपी कर्मचारियों को उकसा रहे थे कि वे कंपनियों में तोड़फोड़ करें, वाहनों को आग लगाएं और पुलिस पर पथराव करें।

आरोपियों की हुई गिरफ्तारी
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान रोहतक, जींद, उत्तराखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश के निवासियों के रूप में हुई है। पकड़े गए आरोपियों में शामिल हैं-आकाश (निवासी भरान, रोहतक),अजीत सिंह (निवासी लखमीरवाला, जींद),हरीश चंद (निवासी पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड),पिंटू कुमार यादव (निवासी मधुबनी, बिहार),राजू सिंह (निवासी उद्यम सिंह नगर, उत्तराखंड),श्यामबीर (निवासी बदायूं, उत्तर प्रदेश)

9 अप्रैल को हुआ था हिंसक प्रदर्शन
मानेसर IMT में सैलरी को लेकर शुरू हुआ विवाद उस समय हिंसक हो गया था जब प्रदर्शनकारी कर्मचारी सड़क पर उतर आए थे। पुलिस को स्थिति नियंत्रण में करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा था, जिसमें 20 से ज्यादा कर्मचारी घायल हुए थे।भड़के हुए तत्वों ने पुलिस की एक बाइक को आग के हवाले कर दिया था और सरकारी वाहनों पर पथराव किया था।

पुलिस की अपील अपनाएं शांतिपूर्ण रास्ता
गुरुग्राम पुलिस प्रवक्ता संदीप कुमार ने बताया कि गिरफ्तार किए गए अधिकांश आरोपियों का किसी भी कंपनी से कोई सीधा संबंध नहीं है। ये बाहरी लोग केवल माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने सभी श्रमिकों से अपील की है कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण रास्ता अपनाएं और किसी भी बाहरी व्यक्ति के उकसावे में न आएं।

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