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हरियाणा सरकार ने अपने लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलने वाली लीव ट्रैवल कंसेशन सुविधा में बड़ा और कड़ा बदलाव किया है। 

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब कर्मचारी पर्यटन के बदले नकद भुगतान या एक महीने की अतिरिक्त सैलरी/पेंशन का लाभ नहीं ले पाएंगे।

क्या हैं नए दिशा-निर्देश?
मानव संसाधन विभाग द्वारा जारी नए आदेशों के अनुसार, भविष्य में एलटीसी का लाभ उठाने के लिए कर्मचारियों को वास्तव में यात्रा (पर्यटन) करना अनिवार्य होगा। सरकार ने 2009 से लागू उस प्रावधान को वापस ले लिया है, जिसके तहत कर्मचारी बिना यात्रा किए ही एलटीसी के बदले एक महीने का वेतन या पेंशन का क्लेम ले सकते थे।

कब से लागू होगा यह नियम?
अंतिम मौका: कर्मचारी अभी चल रहे 2026-2029 एलटीसी ब्लॉक के तहत 31 दिसंबर 2027 तक ही पुरानी व्यवस्था (सैलरी/पेंशन के बदले कैश) का लाभ उठा सकेंगे।
पूर्ण बदलाव: 1 जनवरी 2028 से यह विकल्प पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। इसके बाद यात्रा करना ही एलटीसी प्राप्त करने का एकमात्र आधार होगा।

किन पर होगा असर?
यह निर्णय राज्य के सरकारी तंत्र के एक बड़े हिस्से को प्रभावित करेगा, जिसमें शामिल हैं:

  • सभी सरकारी विभागों, बोर्डों और निगमों के नियमित कर्मचारी।
  • सेवानिवृत्त पेंशनभोगी।
  • आउटसोर्स कर्मचारी (हार्मोन के माध्यम से कार्यरत)।
  • न्यायिक अधिकारी और अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी।
  • विभिन्न वैधानिक निकायों के अध्यक्ष और गैर-आधिकारिक सदस्य।

सरकार ने दिया तर्क 
सरकार का कहना है कि एलटीसी का मूल उद्देश्य पर्यटन और यात्रा को बढ़ावा देना है। दशकों से यह सुविधा एक प्रकार के 'बोनस' या 'कैश बेनिफिट' में बदल गई थी, जिसे अब सरकार मूल उद्देश्य के साथ जोड़ रही है। इस बदलाव से सरकार का प्रयास है कि कर्मचारी और उनके परिवार वास्तव में देश के विभिन्न पर्यटन स्थलों की यात्रा करें और पर्यटन को बढ़ावा मिले।

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