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उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में इन दिनों बाघों की मौजूदगी के उत्साहजनक संकेत मिल रहे हैं।

गरियाबंद/मैनपुर। उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में इन दिनों बाघों की मौजूदगी के उत्साहजनक संकेत मिल रहे हैं। लंबे समय तक नक्सल प्रभाव से प्रभावित रहे इस क्षेत्र में अब हालात सामान्य होने के बाद जंगलों में फिर से रौनक लौटती दिखाई दे रही है। आमजन के साथ-साथ वन्य जीव भी अब जंगलों में स्वच्छंद रूप से विचरण करते नजर आ रहे हैं।

दरअसल, देशभर में चल रहे ऑल इंडिया टाइगर एस्टीमेशन 2026 के तहत उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में बड़े पैमाने पर सर्वे किया जा रहा है। सर्वे के दौरान लगाए गए ट्रैप कैमरों में लगातार बाघों की तस्वीरें कैद हो रही हैं, जिससे वन विभाग में उत्साह का माहौल है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के डीएफओ वरुण जैन ने बताया कि नक्सल प्रभाव कम होने के बाद पहली बार रिजर्व के सभी 143 बीट्स में बाघों की गणना कराई जा रही है। पहले सुरक्षा कारणों से केवल 60 से 70 प्रतिशत क्षेत्र में ही सर्वे संभव हो पाता था। उन्होंने बताया कि इस बार पूरे रिजर्व क्षेत्र में व्यवस्थित तरीके से ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं और कई स्थानों से बाघों की तस्वीरें मिल रही हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि क्षेत्र में बाघों की गतिविधि मौजूद है और उनका मूवमेंट लगातार दर्ज किया जा रहा है।

सर्वे से सही आकलन
वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि पूरे क्षेत्र में व्यापक सर्वे होने से बाघों की वास्तविक संख्या और उनके आवागमन का सही आकलन हो सकेगा। साथ ही, इससे संरक्षण की योजनाओं को और प्रभावी बनाने में भी मदद मिलेगी।

बन रहा अनुकूल माहौल
विशेषज्ञों का कहना है कि जंगल में लगातार सुनाई दे रही बाघों की दहाड़ यह संकेत देती है कि उदंती-सीतानदी का वन क्षेत्र फिर से वन्यजीवों के लिए सुरक्षित और अनुकूल बनता जा रहा है, जिससे आने वाले समय में इस रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ने की उम्मीद भी जताई जा रही है।

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