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मध्य प्रदेश के पंचायत शिक्षकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर बेंच ने राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है।

mp panchayat teacher मध्य प्रदेश के पंचायत शिक्षकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर बेंच ने राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने पंचायत शिक्षकों को अन्य सरकारी कर्मचारियों के समान वेतनमान देने के अपने पहले के फैसले को बरकरार रखा है।

सरकार की याचिका खारिज
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें पंचायत शिक्षकों को सरकारी कर्मचारियों के समान वेतनमान देने और छठे वेतन आयोग का लाभ देने का निर्देश दिया गया था।

हालांकि, अदालत ने सरकार की पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि पंचायत शिक्षकों को भी समान वेतनमान और सरकारी कर्मचारियों के बराबर सुविधाएं मिलनी चाहिए।

1 जनवरी 2006 से मिलेगा छठे वेतन आयोग का लाभ
कोर्ट ने अपने फैसले में राज्य सरकार के 29 दिसंबर 2017 के आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि पंचायत शिक्षकों को छठे वेतन आयोग का लाभ 1 जनवरी 2006 से दिया जाए। साथ ही अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि शिक्षकों को बकाया राशि का भुगतान 6 प्रतिशत ब्याज के साथ किया जाए।

सरकार ने दी थी अलग तारीख से लाभ देने की दलील
राज्य सरकार का कहना था कि छठे वेतन आयोग का लाभ 1 अप्रैल 2007 से दिया जाना चाहिए। इसी आधार पर सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, लेकिन अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।

भेदभाव नहीं किया जा सकता
मामले की सुनवाई जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने की। कोर्ट ने कहा कि पंचायत कर्मचारियों को समान वेतनमान देने का मुद्दा पहले भी कई फैसलों में स्पष्ट किया जा चुका है। जब राज्य सरकार खुद पंचायत कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारियों के समान वेतन देने का निर्णय ले चुकी है, तो उनके साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता।

पहले जारी किए गए थे आदेश
राज्य सरकार ने 7 जुलाई 2017 और 29 दिसंबर 2017 को आदेश जारी कर पंचायत शिक्षकों को छठे वेतन आयोग का लाभ 1 अप्रैल 2007 से देने की बात कही थी।

इसके खिलाफ पंचायत शिक्षकों ने कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने मांग की थी कि उन्हें वेतन आयोग का लाभ उनकी प्रारंभिक नियुक्ति तिथि से दिया जाए।

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