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ठगों ने खुद को TRAI और CBI अधिकारी बताकर डराया। गिरफ्तारी का डर दिखाकर आरोपियों ने युवती को दो दिनों तक स्काइप वीडियो कॉल पर नजरबंद रखा और बैंक वेरिफिकेशन के नाम पर रुपये ठग लिए।

हरियाणा के जींद जिले में साइबर अपराधियों के दुस्साहस और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाने वाला एक मामला सामने आया है। नरवाना के बीरबल नगर की रहने वाली नीतू पेशे से ट्रेडमार्क फाइलिंग एजेंट है। वह शातिर ठगों के 'डिजिटल अरेस्ट' के जाल में फंस गई। उसे इंसाफ के लिए एक पुलिस थाने से दूसरे थाने तक पूरे एक साल का लंबा और थका देने वाला सफर तय करना पड़ा।

538 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस का दिखाया डर 
ठगी की यह कहानी जुलाई 2024 में शुरू हुई। नीतू के पास अनजान नंबरों से फोन आए, जिसमें फोन करने वाले ने खुद को भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) का अधिकारी बताया। जालसाजों ने बेहद पेशेवर अंदाज में दावा किया कि नीतू के आधार कार्ड पर एक अवैध सिम सक्रिय है। इस सिम का इस्तेमाल जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल से जुड़े 538 करोड़ रुपये के हाई-प्रोफाइल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में किया गया है। खुद को सीबीआई (CBI) और मुंबई पुलिस का अधिकारी बताकर ठगों ने युवती को जेल भेजने की धमकी दी।

दो दिनों तक वीडियो कॉल पर रखा 'नजरबंद' 
ठगों ने नीतू पर दबाव बनाया कि उसे तुरंत मुंबई के अंधेरी ईस्ट पुलिस स्टेशन पहुंचना होगा। जब नीतू ने अपनी बीमारी का हवाला दिया, तो अपराधियों ने उसे 'डिजिटल अरेस्ट' करने का नया पैंतरा आजमाया। उसे मजबूर किया गया कि वह लगातार दो दिनों तक स्काइप (Skype) वीडियो कॉल पर रहे। इस दौरान उसे किसी से बात करने या कमरे से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी। ठगों ने उसे डराने के लिए सुप्रीम कोर्ट, सीबीआई और ट्राई (TRAI) के फर्जी लेटरहेड वाले दस्तावेज दिखाए, जिससे वह पूरी तरह खौफजदा हो गई।

सत्यापन के बहाने खातों से निकाली रकम 
जब युवती पूरी तरह उनके मनोवैज्ञानिक दबाव में आ गई, तो ठगों ने 'बैंक ट्रांजैक्शन वेरिफिकेशन' का नाटक शुरू किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि खातों की जांच के बाद उसका नाम केस से हटा दिया जाएगा। डर के कारण नीतू ने पहली किस्त के रूप में 50 हजार रुपये एक यूपीआई (UPI) आईडी पर भेजे और फिर 31 हजार रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दिए। जब आरोपियों ने 1.50 लाख रुपये की और मांग की, तब नीतू को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसे समझ आया कि वह किसी सरकारी जांच का नहीं बल्कि एक बड़े फ्रॉड का शिकार हुई है।

पुलिस ने एक साल तक चक्कर कटवाए
ठगी से ज्यादा दर्दनाक नीतू के लिए उसके बाद का घटनाक्रम रहा। पुलिस के पास पहुंचने पर उसे सहायता के बजाय अपमान और लापरवाही का सामना करना पड़ा। जींद साइबर थाने ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि ठगी की राशि 1 लाख से कम है, इसलिए मामला स्थानीय थाने का है। वहीं, नरवाना शहर थाने ने साइबर उपकरणों की कमी का बहाना बनाकर उसे वापस भेज दिया। नीतू का आरोप है कि पुलिस अधिकारी उसके साथ बुरा बर्ताव करते थे और एक साल तक जांच अधिकारी (IO) तक नियुक्त नहीं किया गया।

अदालत और ASP के दखल के बाद दर्ज हुई FIR
थक-हारकर नीतू ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अंततः 17 दिसंबर 2025 को एडिशनल एसपी (ASP) सोनाक्षी सिंह ने इस मामले में व्यक्तिगत रुचि ली और नीतू के बयान दर्ज किए। जांच में डिजिटल अरेस्ट की पुष्टि होने के बाद अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा नंबर 13 दर्ज किया गया है। नीतू ने अब मानवाधिकार आयोग में शिकायत दी है और उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है जिन्होंने उसे साल भर तक परेशान किया।

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