हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री और भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान संदीप सिंह के खिलाफ चल रहे यौन उत्पीड़न के मामले में एक बड़ा मोड़ आया है। चंडीगढ़ जिला एवं सत्र न्यायालय ने इस केस को वर्तमान अदालत से हटाकर दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है। यह फैसला पीड़ित जूनियर महिला कोच द्वारा दायर उस याचिका पर आया है, जिसमें उन्होंने मौजूदा न्यायाधीश की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए थे।
केस ट्रांसफर के पीछे की मुख्य वजहें
चंडीगढ़ जिला एवं सत्र न्यायाधीश एचएस ग्रेवाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानांतरण आवेदन को मंजूरी दी। पीड़िता ने अपनी अर्जी में उन कारणों को गिनाया था, जिसके चलते उन्हें न्याय की उम्मीद धुंधली नजर आ रही थी।
1. न्यायाधीश खुद गवाह की सूची में : पीड़िता ने दलील दी कि जिस अदालत (एसीजेएम राहुल गर्ग) में सुनवाई चल रही थी, वहां के पीठासीन अधिकारी स्वयं अभियोजन पक्ष के गवाहों की लिस्ट में 19वें स्थान पर दर्ज हैं। कानूनी नियमों के अनुसार, कोई व्यक्ति एक ही मामले में गवाह और न्यायाधीश की भूमिका साथ नहीं निभा सकता।
2. पक्षापात और पूर्वाग्रह के आरोप : जूनियर कोच का आरोप था कि न्यायाधीश ने उन्हें सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज उनके खुद के बयानों की कॉपी तक नहीं देखने दी। पीड़िता का कहना था कि उन्हें अपनी गवाही से पहले अपने ही पिछले बयानों की जांच करने का मौका नहीं दिया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
3. लाई डिटेक्टर टेस्ट का विवाद : इससे पहले इसी अदालत ने संदीप सिंह के 'पॉलीग्राफ टेस्ट' (झूठ पकड़ने वाले टेस्ट) के आवेदन को खारिज कर दिया था, जिस पर पीड़िता ने आपत्ति जताई थी।
दिसंबर 2022 में शुरू हुआ था विवाद
यह पूरा विवाद दिसंबर 2022 में शुरू हुआ था। जूनियर महिला कोच ने आरोप लगाया था कि रियो ओलंपिक के बाद जब वह खेल विभाग में भर्ती हुई, तो तत्कालीन खेल मंत्री संदीप सिंह ने उन्हें सोशल मीडिया पर परेशान करना शुरू किया।
पीड़िता के अनुसार, मंत्री ने उन्हें चंडीगढ़ स्थित अपने सरकारी आवास पर बुलाया और अभद्र प्रस्ताव देते हुए कहा तुम मुझे खुश रखो, मैं तुम्हें खुश रखूंगा। जब महिला कोच ने उनकी बात मानने से इनकार कर दिया, तो मंत्री ने कथित तौर पर उनका तबादला झज्जर कर दिया और उनकी ट्रेनिंग भी रुकवा दी।
गंभीर आरोपों की फेहरिस्त
संदीप सिंह के खिलाफ सेक्टर-26 थाने में आईपीसी की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज है। जिसमें छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न की धारा 354, 354ए, 354बी के तहत गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोप हैं। वहीं धारा 342 (गलत तरीके से कैद करना) और धारा 506 (आपराधिक धमकी) भी लगी है। पीड़िता ने कोर्ट को बताया था कि मंत्री ने उन्हें बेडरूम के पास जबरन दबोचा, उनके साथ अश्लील हरकतें कीं और विरोध करने पर उनके साथ मारपीट भी की गई।
संदीप सिंह बोले- यह एक साजिश है
दूसरी ओर, संदीप सिंह ने शुरुआत से ही इन सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका तर्क है कि महिला कोच का ट्रांसफर प्रशासनिक कारणों से किया गया था, लेकिन वह पंचकूला में ही टिके रहना चाहती थीं। संदीप सिंह का दावा है कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया जा रहा है और उन्होंने किसी भी तरह की अमर्यादित हरकत नहीं की है।
नई अदालत में नए सिरे से सुना जाएगा मामला
अब यह मामला एक नई अदालत में नए सिरे से सुना जाएगा। इस स्थानांतरण से पीड़िता को उम्मीद है कि अब बिना किसी 'पूर्वाग्रह' के साक्ष्यों की जांच होगी। चंडीगढ़ पुलिस ने इस मामले में पहले ही चार्जशीट दाखिल कर दी है, और अब नई कोर्ट में गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।











