मंगलवार को प्रदेश के कई हिस्सों में हुई मूसलाधार बारिश और भारी ओलावृष्टि के कारण 7 जिलों में गेहूं, सरसों और चने की तैयार फसल को भारी नुकसान पहुँचा है। प्रशासन की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 100 से ज्यादा गांवों में फसलें पूरी तरह खेतों में बिछ गई हैं।
इन जिलों में हुआ सबसे ज्यादा नुकसान
ओलावृष्टि और तेज हवाओं का सबसे ज्यादा तांडव इन जिलों में देखने को मिला।हिसार (खासकर मिर्जापुर और आसपास के इलाके),सिरसा और फतेहाबाद,भिवानी और चरखी दादरी,रेवाड़ी और महेंद्रगढ़
मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासन 'किसान का बेटा हूँ, दर्द समझता हूँ'
फसलों की बर्बादी पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किसानों को मदद का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा, "मैं एक किसान का बेटा हूँ और इस प्राकृतिक आपदा के दर्द को समझता हूँ। पटवारी और तहसीलदारों को तुरंत गिरदावरी के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट मिलते ही प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाएगा।"
मार्च के अंत में लौटी 'ठिठुरन'
ओलों के कारण प्रदेश के तापमान में अचानक गिरावट आई है, जिससे मौसम एक बार फिर ठंडा हो गया है।
- अधिकतम पारा गिरा: रोहतक में तापमान सामान्य से 4.6°C नीचे गिरकर 27.9°C पर आ गया।
- न्यूनतम तापमान: करनाल राज्य में सबसे ठंडा रहा, जहाँ पारा 14.9°C दर्ज किया गया।
- असर: अचानक बढ़ी नमी और ठंडी हवाओं के कारण लोगों को अप्रैल की शुरुआत में भी चादर ओढ़नी पड़ रही है।
मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विज्ञान केंद्र, चंडीगढ़ के अनुसार राहत की उम्मीद कम है:
- 1 और 2 अप्रैल: मौसम शुष्क रहने की संभावना है।
- 3 और 4 अप्रैल: प्रदेश में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिससे फिर से बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया गया है।
विशेषज्ञों की किसानों को सलाह
कृषि विशेषज्ञों ने इस संकट के समय किसानों को कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:
- कटाई रोकें: वर्तमान में फसलों में नमी अधिक है, इसलिए कटाई तुरंत बंद कर दें।
- सुखाने का इंतज़ार: जब तक फसल पूरी तरह सूख न जाए, तब तक थ्रेसिंग न करें, वरना दाना काला पड़ सकता है और गुणवत्ता खराब हो सकती है।
- जल निकासी: जिन खेतों में पानी जमा है, वहां से निकासी का प्रबंध करें।
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