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हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज उस वक्त स्थिति असहज हो गई जब प्रश्नकाल के दौरान विपक्षी दीर्घा की अधिकांश सीटें खाली नजर आईं।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस स्थिति पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कांग्रेस और विपक्षी विधायकों के रवैये को 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया है।

11 बजे का समय, खाली कुर्सियां और स्पीकर का पुकार
सदन की कार्यवाही सुबह ठीक 11 बजे प्रश्नकाल के साथ शुरू हुई। विधानसभा स्पीकर हरविंद्र कल्याण ने नियमों के मुताबिक उन विधायकों के नाम पुकारना शुरू किया जिन्होंने जनता की समस्याओं से जुड़े सवाल लगाए थे। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि जब-जब किसी कांग्रेसी विधायक का नाम पुकारा गया, सदन में उनकी सीट खाली पाई गई।

मुख्यमंत्री ने जताया गहरा दुख
विपक्ष की अनुपस्थिति का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सदन में कहा कि "यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्षी विधायक जनता के सवालों को लेकर गंभीर नहीं हैं। प्रश्नकाल का समय 11 बजे तय था, लेकिन सदन की कार्यवाही शुरू होने के काफी देर बाद तक भी वे अपनी सीटों पर नहीं पहुंचे। जनता ने उन्हें अपनी आवाज उठाने के लिए चुनकर भेजा है, लेकिन उनका यह आचरण लोकतंत्र के प्रति उनकी संवेदनहीनता को दर्शाता है।"

सदन में सन्नाटा, सरकार के तेवर सख्त
सदन में चर्चा के दौरान यह मुद्दा छाया रहा कि जब प्रश्नकाल जैसा महत्वपूर्ण समय चल रहा हो, जिसमें सरकार को घेरने और जनता के मुद्दे सुलझाने का सीधा मौका मिलता है, तब विपक्ष का इस तरह नदारद रहना कई सवाल खड़े करता है। स्पीकर द्वारा बार-बार नाम पुकारे जाने के बावजूद विपक्षी खेमे से कोई जवाब नहीं आया, जिसे सत्ता पक्ष ने 'जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़' बताया है।

मुख्य बिंदु

  • समय का अभाव: प्रश्नकाल सुबह 11 बजे शुरू हुआ, जिसमें विपक्ष के विधायक अनुपस्थित रहे।
  • स्पीकर की कार्रवाई: हरविंद्र कल्याण ने नाम पुकारे, लेकिन अधिकांश कांग्रेसी विधायक सीट पर नहीं थे।
  • CM का प्रहार: मुख्यमंत्री ने इसे विपक्ष की गैर-जिम्मेदाराना राजनीति का हिस्सा बताया।

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