हरियाणा के पानीपत जिले में खाकी की कार्यप्रणाली पर न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। एक पीड़ित की शिकायत पर गौर करने के बजाय उसे ही आरोपी बनाने के मामले में स्थानीय कोर्ट ने सख्त कदम उठाया है। अदालत के हस्तक्षेप के बाद अब किला थाने के तत्कालीन एसएचओ (SHO), एक सब-इंस्पेक्टर (SI) और छह अन्य निजी व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
मेडिकल लीगल रिपोर्ट और सीटी स्कैन के दस्तावेजों से हुई पुष्टि
यह पूरा मामला राजाखेड़ी गांव के निवासी राजेश से जुड़ा है। पीड़ित राजेश ने अधिवक्ता महिंद्र सिंह देशवाल के माध्यम से अदालत में एक आपराधिक याचिका दायर की थी। शिकायत के अनुसार 3 अक्टूबर 2025 को राजेश पर उनके चचेरे भाइयों और उनके परिवार के सदस्यों मंजीत, वजीर, दर्शन, सीमा और लाली ने घातक हथियारों से हमला किया था। आरोप है कि हमलावरों ने कुल्हाड़ी, दाह और डंडों का इस्तेमाल किया, जिससे राजेश के सिर और पैर में गंभीर चोटें आईं। इस हमले की पुष्टि मेडिकल लीगल रिपोर्ट (MLR) और सीटी स्कैन के दस्तावेजों से भी हुई है।
पीड़ित बना आरोपी
राजेश का आरोप है कि जब वह गंभीर रूप से घायल अवस्था में न्याय पाने के लिए किला थाने पहुंचे, तो वहां तैनात तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक नीरज लाठवाल और जांच अधिकारी (IO) एसआई अनूप ने हैरान करने वाला रुख अपनाया। पुलिस ने हमलावरों पर शिकंजा कसने के बजाय उल्टा पीड़ित राजेश के खिलाफ ही फर्जी प्राथमिकी दर्ज कर दी। राजेश का दावा है कि जांच अधिकारी आरोपियों का नजदीकी रिश्तेदार है, जिसके कारण पुलिस ने मिलीभगत कर सच्चाई को दबाने का प्रयास किया।
न्यायालय का सख्त आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMIC) विकास वर्मा ने केस फाइलों और चिकित्सा साक्ष्यों का सूक्ष्मता से अवलोकन किया। कोर्ट ने माना कि यह एक गंभीर संज्ञेय अपराध है और न्याय सुनिश्चित करने के लिए पुलिस जांच अनिवार्य है।
अदालत ने मौजूदा किला थाना प्रभारी को आदेश दिया है कि आरोपियों के खिलाफ तुरंत केस दर्ज कर मामले की गहराई से तफ्तीश की जाए। साथ ही न्यायाधीश ने 28 अप्रैल 2026 तक इस मामले में की गई कार्रवाई की स्टेट्स रिपोर्ट पेश करने के भी निर्देश दिए हैं। इस फैसले के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और अब विभाग को अपनी ही पूर्व टीम के खिलाफ जांच करनी होगी।









