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हरियाणा के भिवानी में ठंड से अब सब्जियों की फसल दम तोड़ने लगी हैं। मोटे अनाज की फसलों के लिए ठंड को लाभकारी माना जा रहा है, परंतु सब्जियां ठंड से मुरझाने लगी हैं। यदि जल्द मौसम नहीं सुधरा तो किसानों को सब्जियों की फसलों से हाथ धोना पड़ा सकता है। जिससे किसानों की आर्थिक सेहत पर भी असर पड़ेगा।

 Bhiwani। भले ही दोपहर बाद चटक धूप खिलती हो,लेकिन कड़ाके की ठंड से जनजीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त हो गया। कड़ाके की ठंड की वजह से सब्जियों की फसलों ने भी दम तोड़ना आरंभ कर दिया है। हालांकि किसान मोटे अनाज वाली फसलों के लिए फायदेमंद मान रहे है,लेकिन सब्जियों मंे चप्पल कद्दू, बैगन व आलू की फसल पूरी तरह से प्रभावित हो रही है। कड़ाके की ठंड की वजह से चप्पल कद्दू की फसल तो पूरी तरह से जलने लगी है। अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो जल्द ही किसानों को इस फसल से हाथ धोने पड़ सकते है। वहीं रविवार को भी जबरदस्त ठंड रही। पारा पांच डिग्री सेल्सियस के आसपास ही घुमता रहा।

ठंड से जलने लगे पत्ते

कड़ाके की ठंड से मोटे अनाज की फसलों में तो रौनक है,लेकिन सब्जियों की फसले मुरझाने लगी है। सबसे ज्यादा असर चप्पल कददू, आलू, बैगन व टमाटर की फसलों पर दिखाई देने लगा है। इन फसलों के पत्ते कड़ाके की ठंड की वजह से जलने लगे है। चप्पल कद्दू की बेलों के ज्यादा ठंड की वजह से पत्त्ते गिरने शुरू हो गए है। आगे फूल आना भी बंद हुआ है। अगर अगले एक.दो दिनों तक इसी तरह सर्दी का सितम रहा तो चप्पल कद्दू की फसल पूरी तरह से झुलस जाएगी। पैदावार खत्म हो जाएगी। ऐसे में किसानों को मोटा नुकसान होने की आशंका बन जाएगी। सबसे ज्यादा नुकसान चांग व उसके आसपास के इलाकों में होने की आशंका है। क्योंकि इन्हीं इलाकों में चप्पल कद्दू की सबसे ज्यादा फसल उगाई जा रही है। अन्य इलाकों में उगाई गई सब्जियों की फसलों में नुकसान होने की आशंका बनी है।

धुंध की तनी चादर,अलाव का लिया सहारा;

रविवार को लोग जब सोकर उठे तो उस वक्त चहुंओर धुंध की चादर तनी हुई थी। दस मीटर से ज्यादा दूरी का दिखाई नहीं दे रहा था। वाहन एक दूसरे के पीछे लग कर चले। वाहन चालकों को आधे घंटे का सफर एक से सवा घंटे में तय करना पड़ा। यह स्थिति सभी मार्गों पर बनी। दोपहर 11 बजे जब धूप खिली तो लोगों की दिनचर्या पटरी पर लौटी। इस दौरान पारा 5 डिग्री सेल्सियस के आसपास ही रहा। लोगों ने कड़ाके की ठंड से अलाव के सहारे बैठक छुटकारा पाया। दोपहर तक अनेक जगहों पर लोगों ने अलाव जलाकर अपने आप को ठंड से बचाया। दूसरी तरफ से जनजीवन ही नहीं पशु भी प्रभावित हुए है। खासकर दुधारू पशुओं में दूध देने की क्षमता काफी हद तक प्रभावित हुई है।;

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