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Hisar Raj Thackeray Case: 2012 में महाराष्ट्र के कद्दावर नेता व महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे द्वारा मुंबई से उत्तर भारतीयों को खदेड़ने में बारे दिए गए बयान व उत्तर भारतीयों के साथ हिंसा का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। थाना शहर हांसी में 7 सितंबर 2012 में दर्ज कराए गए मुकदमे में 6 साल से अधिक का समय हो जाने के बावजूद भी कोई कार्रवाई या गिरफ्तारी न होने पर स्थानीय सब डिविजनल जुडिशल मजिस्ट्रेट हांसी की अदालत ने हांसी थाना शहर पुलिस को नोटिस जारी कर इस मामले की स्टेटस रिपोर्ट 5 नवंबर को तलब की है ।
2012 में दर्ज हुआ था केस
7 सितंबर 2012 को दलित राइट्स एक्टिविस्ट व अधिवक्ता रजत कल्सन द्वारा तत्कालीन सब डिविजनल ज्यूडिशल मजिस्ट्रेट अश्विनी कुमार मेहता की अदालत में दफा 156 (3) सीआरपीसी में याचिका दायर कर राज ठाकरे पर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी।
जिसके बाद अदालत ने 7 सितंबर 2012 को एक आदेश जारी कर थाना शहर हांसी के प्रभारी को राज ठाकरे के खिलाफ राजद्रोह व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे। जिस पर एक औपचारिक मुकदमा नम्बर 528/2012 राज ठाकरे के खिलाफ दर्ज हुआ था।
ठाकरे के हक में कैंसिलेशन रिपोर्ट दर्ज की गई
शिकायतकर्ता अधिवक्ता रजत कल्सन ने बताया कि इस मुकदमे के दर्ज होने के बाद हांसी थाना शहर पुलिस के तत्कालीन एसएचओ ने आनन-फानन में कुछ दिन बाद ही 4 अक्टूबर 2012 को इस मामले में सब डिविजनल जुडिशल मजिस्ट्रेट हांसी की अदालत में एक कैंसिलेशन रिपोर्ट राज ठाकरे के हक में अदालत में पेश कर दी गई।
जिस पर अदालत ने दिनांक 11 अक्टूबर 2012 को आदेश जारी कर तत्कालीन शहर थाना प्रभारी के खिलाफ सख्त आदेश जारी करते हुए तत्कालीन एएसपी को उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा था तथा अदालत ने कहा था कि क्योंकि यह आदेश अदालत ने दिया है इसलिए इस मुकदमा को क्षेत्राधिकार के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता है ।
जिसके बाद हांसी के तत्कालीन एसपी ने श्री अश्वनी मेहता तत्कालीन एसडीजेएम हांसी के 11 अक्टूबर 2012 के आदेश के खिलाफ एक निर्वाचन याचिका हिसार श्री सुदेश कुमार शर्मा तत्कालीन अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में दिनांक 26 अक्टूबर 2012 को दायर की थी व उक्त न्यायाधीश को मामले की प्रगति रिपोर्ट भी भेजी थी जिसमे बताया गया कि मामले की जांच जारी है।
पुलिस की रिवीजन याचिका पर फैसला सुनाते हुए तत्कालीन अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हिसार श्री सुदेश कुमार शर्मा ने अपने आदेश दिनांक 25 अगस्त 2015 को अपने फैसले में मुकदमे में पुलिस कार्रवाई पर निराशा जताई तथा कहा कि इतने सालों के बाद भी पुलिस ने इस मुकदमा में इन्वेस्टीगेशन ने कोई कार्रवाई या गिरफ्तारी नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि इस अदालत की तरफ से इस मामले की जांच पर कोई रोक ना है हालांकि तत्कालीन अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने अपने फैसले में हांसी शहर थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाने के निर्देश दे दिए थे।
एडवोकेट रजत कल्सन ने क्या कहा ?
एडवोकेट रजत कल्सन ने बताया कि इस मामले को दर्ज हुए पूरे 6 साल से अधिक हो चुके हैं लेकिन बड़ी हैरत की बात है कि पुलिस ने आज तक मुलजिम को तलब करने के लिए भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 160 का नोटिस तक ना भेजा है ,गिरफ्तारी की बात तो दूर है ।
शिकायतकर्ता रजत कल्सन ने कहा कि इस तरह के व्यक्ति समाज में क्षेत्र के नाम पर जहर घोलने का काम करते हैं तथा इस तरह के लोगों को सलाखों के पीछे होना चाहिए। पुलिस व सरकार के नेक्सस के चलते इस तरह के लोग अभी भी खुला घूम रहे हैं तथा मुकदमा दर्ज होने के बावजूद भी भड़काऊ बयान दे रहे हैं।
इस दिन पेश करनी होगी रिपोर्ट
हांसी उपमंडल न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में एक याचिका दायर की है तथा अदालत को सारे तथ्यों से अवगत कराया गया है कि किसी भी मुकदमे की जांच पूरी करने के लिए के लिए कानूनी समय 90 दिन का होता है परंतु छह साल बाद भी जांच चल रही है।
जिसके बाद अदालत ने प्रभारी थाना शहर हांसी को दिनांक 5 नवंबर को रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस इस मामले में आरोपी को गिरफ्तार नहीं करती है तो वह इस मामले में आगामी कार्रवाई के लिए हाई कोर्ट का रुख करेंगे साथ ही इस मामले में जांच अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई करने की मांग करेंगे।
