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Delhi Crime News: स्पेशल सेल ने कुख्यात और इनामी अपराधी मोहम्मद उमर को 12 साल बाद गिरफ्तार किया है। यह हत्या के मामले में वांछित था और इसकी गिरफ्तारी पर 2013 में 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। इसने 2012 में पीड़ित के शव और चेहरे को तेजाब डालकर जला दिया था, ताकि उसकी पहचान छुपी रह सके। बदमाश के कब्जे से .32 बोर की एक पिस्टल और चार कारतूस बरामद हुए हैं। आरोपी सात आपराधिक मामलों में शामिल रहा है।

पुलिस ने ट्रैप लगाकर दबोचा

उमर उर्फ उमरदीन खजूरी खास का रहने वाला है। वह मूल रूप से बहराइच, उत्तर प्रदेश से है। 51 वर्षीय आरोपी पर सोनिया विहार थाना इलाके में जघन्य हत्या का आरोप था। मामले में एक दशक से अधिक समय से अपनी गिरफ्तारी से वह बच रहा है। हाल ही में सेल की टीम को सूचना मिली कि वांछित अपराधी मोहम्मद उमर चौधरी चरण सिंह सर्विस रोड, डीडीए कार्यालय आनंद विहार बस टर्मिनल के पास आएगा। इसके बाद पुलिस ने ट्रैप लगाकर उसे दबोच लिया।

ऐसे बना कुख्यात अपराधी

उमर का जन्म ब्रह्मपुर, जानी, मेरठ में हुआ था। 8वीं कक्षा तक पढ़ाई के बाद इसने अपने पिता की यूनिट में दर्जी का काम किया। 2002 में वह क्षेत्र के बुरे तत्वों के संपर्क में आया और चोरी और अन्य छोटे मोटे अपराधों में लिप्त हो गया। इसने कई ट्रांसफार्मर चोरी किए। 2009 में लोनी और पिलखुवा के चार मामलों में इसे गिरफ्तार किया गया था।

2010 में वह नईम, तस्लीम, मुकेश और मोती के संपर्क में आया और अफीम की तस्करी में शामिल हो गया। इसने कई लोगों को रियाल (सऊदी मुद्रा) बदलने का लालच देकर भी ठगा था। 2011 में इसे आर्म्स एक्ट व धोखाधड़ी के मामले में अमरोहा उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया था। जमानत पर छूटने के बाद उसने नईम, तस्लीम, मुकेश और मोती के साथ फिर से मादक पदार्थ की तस्करी शुरू कर दी।

इसके दोस्तों ने उमर को बताया कि मुकेश ने उसके बारे में सूचना अमरोहा पुलिस को सूचना दी थी। इसके बाद नईम, तस्लीम और मोती के साथ मिलकर इसने मुकेश को खत्म करने की योजना बनाई थी। नईम, तस्लीम और मोती ने बागपत में मुकेश की हत्या कर दी थी। इस मामले में तीनों गिरफ्तार हो गए थे।

2012 से था फरार

2012 में इसने नईम के साथ मिलकर दिल्ली के सोनिया विहार इलाके में तस्लीम की भी हत्या कर दी थी और पुलिस को धोखा देने और पहचान छिपाने के लिए तस्लीम के चेहरे पर तेजाब डालकर जला दिया गया था। इस वारदात के बाद वह अपने परिवार के साथ नेपाल भाग गया था। 2013 में अदालत ने इसे भगोड़ा घोषित किया था। वह रूपड़िया सीमा पार नेपाल की ओर से कभी-कभार काम के सिलसिले में भारत आता था। उसकी कई लोगों से दुश्मनी थी इसलिए वह हमेशा अवैध पिस्तौल अपने पास रखता था और अपने आधार कार्ड और अन्य आईडी में अपना नाम बदल लेता था।