दिल्ली में पानी के बिल पर अधिशुल्क (भुगतान में देरी पर लगाए जाने वाली जुर्माना राशि) माफी योजना की समयावधि 15 अगस्त तक बढ़ा दी गई थी, लेकिन आम आदमी पार्टी ने इस योजना की अवधि बढ़ाने के पीछे भ्रष्टाचार की आशंका जताई है। आम आदमी पार्टी, दिल्ली के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दिल्ली जल बोर्ड की इस योजना को फ्लॉप बताते हुए भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है।
आप नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि बीजेपी ने सरकार बनते ही वादा किया था कि दिल्ली जल बोर्ड के बिलों को लेकर क्रांतिकारी योजना लाई जाएगी। लेकिन, ये ऐसी स्कीम ले आए, जिसमें कहा गया कि दिल्ली जल बोर्ड के उपभोक्ता अपने पानी के बकाया बिल की लेट पेमेंट सरचार्ज माफ करा पाएंगे, उन्हें केवल मूल राशि का ही भुगतान करना होगा। उन्होंने कहा कि लाखों उपभोक्ता ऐसे हैं, जिन्हें भारी भरकम पानी का बिल थमा दिया। उन्होंने पूछा कि उपभोक्ता बोल रहे हैं कि जब उन्होंने इतना पानी इस्तेमाल ही नहीं किया तो वे बिल क्यों दें?
इस योजना के पीछे हो रहा भ्रष्टाचार
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि बीजेपी की यह स्कीम फेल हो गई है। इस योजना के तहत 12 लाख उपभोक्ता ऐसे हैं, जिन्होंने बकाया बिल नहीं चुकाया है। उन्होंने कहा कि सरकार जबरदस्ती उपभोक्ताओं से अनाप शनाप बिल नहीं ले सकती है। लेकिन लोगों को धमकाया जा रहा है कि अगर बिल नहीं दिया तो पानी का कनेक्शन काट दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई ने कल दिल्ली जल बोर्ड के एक कर्मचारी को पकड़ा है, जो कि रिश्वत लेकर पानी के बिलों का निपटारा कर रहा था। इससे साबित होता है कि इस योजना को इसलिए बढ़ाया गया है क्योंकि इसके पीछे भ्रष्टाचार हो रहा है।
15 अगस्त तक के लिए बढ़ी योजना
बता दें कि दिल्ली में पानी के बिल पर अधिशुल्क माफी योजना 31 जनवरी तक समाप्त होनी थी, लेकिन 30 जनवरी को ऐलान किया गया कि यह योजना 15 अगस्त के लिए बढ़ा दी गई है। दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने दावा किया था कि तीन लाख से अधिक लोग इस योजना का लाभ उठा चुके हैं। उन्होंने बताया था कि 16 लाख से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं पर पानी का बिल बकाया है। उन्होंने कहा था कि इस बिल के क्लीयर होने के बाद अगले बिल में अधिशुल्क माफी को दर्शाते हुए अपडेट बिल प्राप्त होंगे। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस योजना का लाभ उठाएं ताकि पानी के भारी भरकम बिलों से राहत मिल जाए और भविष्य में ऐसी समस्या का सामना न करना पड़े।
