पंजाब और हरियाणा के बीच पानी के बंटवारे को लेकर राजनीति तेज हो गई है। खास बात है कि पानी की इस जंग में दिल्ली भी कूद चुका है। दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने आरोप लगाया है कि आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार दिल्ली में मिली हार का बदला ले रही है। उनके इस बयान पर पंजाब के जल मंत्री बरिंद्रर कुमार गोयल ने पलटवार किया है। उन्होंने एक तरह से दिल्ली पेयजल संकट की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए हरियाणा सरकार को जिम्मेदार ठहरा दिया है। 

मीडिया से बातचीत में पंजाब के जल मंत्री बरिंद्रर कुमार गोयल ने कहा कि हरियाणा ने आवंटित जल से अधिक इस्तेमाल किया है। उनके पास पानी के इस्तेमाल करने की कोई योजना नहीं थी। इसके बावजूद हरियाणा जरूरत से ज्यादा पानी का इस्तेमाल कर रहा था। उन्होंने कहा कि हमने बीबीएमबी (भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड) और हरियाणा को पत्र लिखा। इसके अलावा एक कॉपी बिजली मंत्रालय को भी भेजी, लेकिन न तो हरियाणा सरकार ने और न ही केंद्र सरकार ने इस पर ध्यान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के दबाव में इस मुद्दे को उठाया जा रहा है। कहा कि भाजपा हमारे साथ अन्याय कर रही और दबाव बना रही है कि बीबीएमबी से ज्यादा पानी रिलीज करवाया जाए।

कांग्रेस ने भी भगवंत मान की 'जिद्द' का किया समर्थन
पंजाब के सीएम भगवंत मान की जिद्द है कि अब हरियाणा को एक बूंद भी अतिरक्त पानी नहीं दिया जाएगा। खास बात है कि पंजाब कांग्रेस भी इस मुद्दे पर पंजाब सरकार का समर्थन कर रही है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग का कहना है कि हमने दस सालों तक कभी पानी नहीं रोका, लेकिन पंजाब में पानी की कमी है, तो स्वाभाविक है कि हम पंजाब को ही प्राथमिकता देंगे। उन्होंने कहा कि दिल्ली और हरियाणा को अधिक पानी की आवश्यकता होगी, लेकिन हमने पहले ही उनके हिस्से का पानी छोड़ दिया है। ऐसे में हम इस मुद्दे पर पंजाब के लोगों और पंजाब सरकार के साथ हैं। अगर वो हमारा पानी चुरा लेंगे तो हमारे पास क्या बचेगा