MCOCA Case: दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने आज 20 अप्रैल सोमवार को पूर्व AAP विधायक नरेश बालियान से जुड़े मकोका केस में जमानत याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। 'बार एंड बेंच' का कहना है कि जस्टिस शर्मा ने निर्देश देते हुए कहा है कि अब इस मामले को 23 अप्रैल को एक नई बेंच के सामने पेश किया जाएगा। ऐसा कहा जा रहा है कि बालियान इस केस में नियमित जमानत की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा अरविंद केजरीवाल ने भी आबकारी नीति मामले में जस्टिस शर्मा को हटाने की याचिका डाली हुई है।
जानकारी के मुताबिक, नरेश बालियान को साल 2024 में 4 दिसंबर को गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ मकोका MCOCA की धारा 3 और 4 के तहत एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट को पेश किया है। पुलिस ने आरोप लगाया है कि बालियान का, फरार गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू के संगठित अपराध गिरोह से कनेक्शन सामने आया था, जिसके बाद उन पर कड़ी कार्रवाई की गई।
बालियान ने जमानत याचिका भी डाली थी, जिसे 15 जनवरी 2025 को निचली अदालत की जज कावेरी बावेजा ने खारिज कर दिया था। कोर्ट ने माना था कि 'आप' नेता और गैंगस्टर सांगवान के संगठित अपराध गिरोह के बीच संबंध के ठोस सबूत पाए गए हैं, लेकिन बालियान के वकील ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है, उन्होंने तर्क दिया था कि मकोका लगाने का कोई ठोस आधार नहीं है, बालियान का सांगवान गिरोह से कोई संबंध नहीं है।
मकोका मामले में हुई थी गिरफ्तारी
बताया जा रहा है कि बालियान को साल 2025 में 4 दिसंबर को जबरन वसूली के एक मामले में जमानत मिल गई थी, लेकिन उसके कुछ घंटों बाद उन्हें मकोका मामले में फिर से गिरफ्तार कर लिया गया था। जिसके बाद 13 मार्च को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस शर्मा ने जांच में हो रही सुस्ती को लेकर दिल्ली पुलिस का फटकारा था।
कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि 'आरोपी 2024 से सलाखों के पीछे है, ऐसे में पुलिस को जांच जल्द से जल्द पूरी करनी चाहिए थी। अदालत ने सवाल उठाया कि आखिर यह जांच और कितने वक्त तक खिंचती रहेगी? कोर्ट की टिप्पणी थी कि अगर जांच ही पूरी नहीं होगी, तो मामले की मुख्य सुनवाई (ट्रायल) आखिर कब शुरू हो पाएगी।'
मकोका एक्ट क्या है?
मकोका एक्ट महाराष्ट्र सरकार द्वारा 1999 में बनाया गया था। इस एक्ट का पूरा नाम 'महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट' है। मकोका का उद्देश्य संगठित और अंडरवर्ल्ड अपराध को पूरी तरह खत्म करना है। इस कानून को महाराष्ट्र के अलावा दिल्ली में भी लागू किया गया है।
इस कानून को संगठित अपराध, अंडरवर्ल्ड और रंगदारी जैसे अवैध वित्तीय लाभ वाले क्राइम पर लागू किया जाता है। मकोका लग जाने से अपराधी के लिए मुश्किलें काफी बढ़ जाती है, क्योंकि इसमें जमानत के प्रावधान बहुत सख्त हैं।