Greater Noida Child Death Case: ग्रेटर नोएडा से एक बार फिर से सिस्टम की लापरवाही ने मासूम बच्चे की जान ले ली। बताया जा रहा है कि यहां पर 3 साल के बच्चे की पानी से भरे गड्ढे में डूबकर मौत हो गई। अभी कुछ दिन पहले भी युवराज मेहता नाम के सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत भी गड्ढे में गिरकर हो गई थी।
इसके अलावा हाल ही में जनकपुरी में दिल्ली जल बोर्ड गड्ढे में गिरकर युवक की मौत ने भी प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों की लापरवाही और सुरक्षा इंतजामों की कमी के कारण इस तरह के हादसे हो रहे हैं।
कैसे हुआ हादसा ?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पूरा मामला ग्रेटर नोएडा के दनकौर क्षेत्र के दलेलगढ़ गांव का बताया जा रहा है। मृत बच्चे की पहचान 3 साल के देवांश के तौर पर हुई है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि देवांश अपनी मां अंजलि के साथ सिकंदराबाद, बुलंदशहर से नाना के घर आया था। यहां गांव के एक मंदिर में 41 दिनों की पूजा के समापन पर भंडारे का आयोजन किया गया था। उस दौरान देवांश खेलते-खेलते पानी से भरे गड्ढे में की तरफ चला गया, जिसमें वह गिर गिया और डूबने से उसकी मौत हो गई।
जब आधे घंटे तक देवांश का पता नहीं लगा तो, परिजनों ने उसे तलाशना शुरू कर दिया। तालाशी के दौरान परिजनों ने उसकी गड्ढे में कैप को तैरते हुए देखा। इसके बाद गांव वालों की मदद से बच्चे को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
ग्रामीणों ने की थी शिकायत
गांव वालों को आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही से यह हादसा हुआ है। ग्रामीण अमित भाटी ने आरोप लगाया है कि 4 जनवरी को ही इस गड्ढे में जलभराव की शिकायत ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों से की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों ने मांग उठाई है कि जो लोग इस हादसे के लिए जिम्मेदार है,उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। गांव वालों का यह भी कहना है कि अगर गड्ढे के चारों ओर सुरक्षा घेरा बना दिया जाता, तो यह हादसा टल सकता था।
देवांश की मौत के बाद परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतक के परिवार का कहना है कि अगर प्रशासन ने समय पर सुरक्षा के उपाय किए होते , तो उनका इकलौता बेटा आज जिंदा होता। परिजन ने मामले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है।
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