Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने बच्चों को अपराध के काम में इस्तेमाल करने के मामले को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। इस मामले में कोर्ट ने एक महिला की अग्रिम जमानत याचिका को भी खारिज कर दिया है। महिला पर आरोप है कि उसने एक नाबालिग बच्चे की तस्करी करके,उसे अवैध शराब के धंधे में लगा दिया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ तौर पर कहा है कि बच्चों को अपराध में इस्तेमाल करना बेहद खतरनाक बढ़ती हुई समस्या है।
जानकारी के मुताबिक, मामले की सुनवाई जस्टिस गिरीश कठपालिया की बेंच में हुई। कोर्ट का कहना है कि अगर इस तरह के गंभीर मामलों में आसानी से अग्रिम जमानत दे दी जाए तो इससे समाज में गलत मैसेज जाता है। जज ने यह भी कहा कि हाल ही में देखा गया कि कुच अपराधी खुद को बचाने के लिए बच्चों को आगे कर देते हैं, उन्हें एक तरह से हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं, जो काफी गंभीर है, जिसे रोकना जरूरी है।
पुलिस का कहना है कि महिला पर बच्चे की तस्करी, अवैध शराब कारोबार और दूसरे गंभीर मामलों में केस दर्ज है। महिला के खिलाफ दिल्ली एक्साइज एक्ट 2009, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 और बीएनएस 2023 की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। जांच एजेंसियों ने कहा कि महिला अवैध शराब गिरोह में भी शामिल थी, जिसके लिए वह पैसे भी लेती थी।
आरोपी महिला ने क्या कहा ?
आरोपी महिला की तरफ से कोर्ट में दलील दी गई कि वह केवल बच्चों को दिल्ली लेकर आई थी, उसका शराब बेचने वालों से कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन अभियोजन पक्ष ने कोर्ट से कहा कि 'महिला की भूमिका केवल बच्चे को लाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह गिरोह के काम में शामिल थी।' दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि आरोप बेहद गंभीर हैं और सच्चाई सामने लाने के लिए महिला की कस्टोडियल पूछताछ जरूरी है। वहीं कोर्ट ने यह भी कहा कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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