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AI Entry in Delhi HC: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दुनियाभर में तेजी से पांव पसार रहा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। पहले चैट जीपीटी के रूप में भारत में एआई को प्रसिद्धि मिली और अब कई सरकारी कामों के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाने लगा है। एआई के तमाम दुष्परिणाम को नजरअंदाज करके इसका अधिक से अधिक लाभ लेने की कोशिश जारी है। ताजा अपडेट जो सामने आई है, इससे आप भी एक पल के लिए हैरान हो सकते हैं। दिल्ली हाईकोर्ट में एआई की एंट्री हो चुकी है। अब हाईकोर्ट में जज जजमेंट देने के लिए एआई का इस्तेमाल किया जाएगा।
मशीन एक वरदान है- जस्टिस राजीव शखदर
दिल्ली हाईकोर्ट ने तहे दिल से तकनीक को अपनाते हुए पहला पायलट हाइब्रिड कोर्ट रूम शुरू किया है। इस कोर्ट रूम में 'स्पीच टू टेक्स्ट' की सुविधा मिलेगी। इस हाइब्रिड कोर्ट रूम का उद्घाटन चीफ जस्टिस मनमोहन, जस्टिस राजीव शखदर और जस्टिस सुरेश कुमार कैत ने किया है। राजीव शखदर ने इसका उद्घाटन करते हुए कहा कि जो काम जज पहले मैन्युअल तरीके से करते थे, अब उस काम को करने में मशीन सहायता करेगा, सचमुच मशीन एक वरदान है। उन्होंने आगे कहा कि अभी तक पीड़ितों द्वारा दिए गए सबूतों को जज अपनी भाषा में बदलते थे, लेकिन अब पीड़ित अपनी भाषा में गवाह पेश करेगा और यह जज के लिए उपलब्ध होगा।
कोर्ट में एआई कैसे करेगा काम
राजीव शखदर ने आगे कहा कि एआई की मदद से किसी केस को निपटाने में समय की बचत होगी और हम अधिक से अधिक केस को जल्दी सुलझा सकेंगे। अदालत एआई ऐप के सह-संस्थापक उत्कर्ष श्रीवास्तव ने इसको लेकर कहा कि इस एआई ऐप को जल्दी से जल्दी केस निपटाने के लिए तैयार किया गया है, ताकि कोर्ट के बैकलॉग को घटाया जा सके। उन्होंने कहा कि कोर्ट दो तरह के होते हैं, पहला जहां स्टेनोग्राफर हैं, लेकिन यह काफी मुश्किल होता है कि रियल टाइम में कुछ टाइप किया जा सके। जहां स्टेनोग्राफर है उनके लिए एआई साथी बनेगा और जहां नहीं है, वहां खुद जज को हाथ से लिखना पड़ता था, लेकिन अब जज एआई का सहारा लेंगे।
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