Delhi Private School Fee: राजधानी में प्राइवेट स्कूलों की फीस को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट की तरफ से यह साफ तौर पर कहा गया है कि, प्राइवेट स्कूलों को फीस तय करने के लिए कमेटी बनाने की जरूरत नहीं होगी। अब इस मामले में कोर्ट 12 मार्च को सुनवाई करेगा, वहीं कोर्ट का फैसला आने तक स्कूलों को कमेटी बनाने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। हाई कोर्ट ने इस फैसले के तहत प्राइवेट स्कूलों को SLFRC गठित करने के दिल्ली सरकार के अध्यादेश पर रोक लगाई है।
दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला प्राइवेट स्कूलों की अलग-अलग एसोसिएशन की तरफ से दायर याचिकाओं पर आया है। ऐसा कहा जा रहा है कि याचिकाओं में दिल्ली सरकार ने 1 फरवरी को जारी नए नोटिफिकेशन को भी चुनौती दी है, जिसमें स्कूलों को फीस निर्धारण के लिए स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटियों (SLFRC) के गठन 10 दिनों के भीतर करने और अगले 3 एकेडमिक सेशन के लिए प्रस्तावित फीस के बारे में बताने के लिए कहा था, जिस पर अदालत ने रोक लगा दी है।
कोर्ट ने क्या कहा ?
हाईकोर्ट ने मामले पर सुनवाई के दौरान कहा कि, 'स्कूल इस एकेडमिक सेशन के लिए उतनी ही फीस ले सकते हैं, जितनी उन्होंने पिछले साल ली थी।' मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि प्राइवेट स्कूल 2026-27 में वही फीस लेंगे, जो 2025-26 के शैक्षणिक सत्र में ले रहे थे, उससे ज्यादा फीस नहीं ले सकेंगे। कोर्ट का यह भी कहना है कि 1 फरवरी के नोटिफिकेशन पर लगी रोक मामले पर अगली सुनवाई तक लागू रहेगी। पीठ ने यह भी कहा कि किसी भी तरह की एक्स्ट्रा फीस को कानून के अनुसार विनियमित किया जाएगा।
याचिका में कौन से स्कूल शामिल ?
पीठ का कहना है कि इस आदेश को कई स्कूल संघों की याचिकाओं पर पारित किया गया। इन याचिकाओं में दिल्ली सरकार द्वारा 1 फरवरी को जारी अधिसूचना पर रोक लगाने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं में दिल्ली पब्लिक स्कूल सोसाइटी, एक्शन कमेटी अनएडेड रिकॉग्नाइज्ड प्राइवेट स्कूल्स, फोरम ऑफ माइनॉरिटी स्कूल्स, फोरम फॉर प्रमोशन ऑफ क्वालिटी एजुकेशन फॉर ऑल, रोहिणी एजुकेशनल सोसाइटी और एसोसिएशन ऑफ पब्लिक स्कूल्स शामिल हैं।
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