दिल्ली एम्स में प्लास्टिक सर्जरी और बर्न यूनिट के डॉक्टर मनीष सिंघल ने बताया कि फेस ट्रांसप्लांट एक दुर्लभ प्रकार की सर्जरी है। इसके लिए लाइसेंस की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही मरीजों को यह निशुल्क सुविधा मिलेगी।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (दिल्ली एम्स) ने आज महत्वपूर्ण ऐलान किया है। इस ऐलान के मुताबिक, दिल्ली एम्स के प्लास्टिक सर्जरी विभाग में अब फेस ट्रांसप्लांट कार्यक्रम भी शुरू किया जाएगा। खास बात है कि मरीज इसका निशुल्क लाभ प्राप्त कर पाएंगे। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्लास्टिक सर्जरी और बर्न यूनिट के डॉक्टर मनीष सिंघल ने बताया कि फेस ट्रांसप्लांट एक दुर्लभ प्रकार की सर्जरी है। इस सर्जरी की मदद से क्षतिग्रस्त चेहरे के ऊतकों को मृत व्यक्तियों द्वारा दान किए गए ऊतकों से बदला जाता है। उन्होंने कहा कि अगर डोनर मिलता है तो फेस ट्रांसप्लांट का कार्यक्रम शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि दिल्ली एम्स में जब भी यह कार्यक्रम पूरी तरह से शुरू होगा, मरीजों को इसका निशुल्क लाभ मिलेगा। 

इन बातों का रखा जाएगा ध्यान 

डॉ. मनीष सिंघल ने आगे बताया कि फेस ट्रांसप्लांट के लिए डोनर की उम्र और जेंडर मरीज की उम्र और जेंडर, एक जैसे होने चाहिए। मसलन, अगर किसी महिला के चेहरे का फेस ट्रांसप्लांट करना है, तो महिला डोनर होनी चाहिए। वहीं उम्र भी ज्यादा नहीं हो क्योंकि इससे फेस की बनावट अच्छी नहीं दिखेगी। इसके अलावा भी कई बातें हैं, जो कि फेस ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी होती हैं। 

फेस ट्रांसप्लांट में कितना समय लगता है

डॉ. मनीष सिंघल ने बताया कि फेस ट्रांसप्लांट में कम से कम दो घंटे का समय लगता है। उन्होंने बताय कि फेस ट्रांसप्लांट को लेकर कई लोग चिंता जताते हैं कि उनके चेहरे की पहचान चली जाएगी। लेकिन विशेषज्ञ इस बात का खास ख्याल रखते हैं और चेहरे की पहचान नहीं खोती है। उन्होंने कहा कि फेस ट्रांसप्लांट के लिए लाइसेंस लेने के लिए आवेदन की प्रक्रिया पर काम चल रहा है। जैसे ही सभी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, इस कार्यक्रम को शुरू कर दिया जाएगा।