औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला सोमवार को धमतरी पहुंचे, जहां उन्होंने औषधीय पौधों के संरक्षण को बढ़ावा देने को लेकर चर्चा की।

उमेश सिंह बशिस्ट-धमतरी। छत्तीसगढ़ में पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धति को सशक्त बनाने और वन औषधियों के संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में पहल तेज हो रही है। इसी कड़ी में आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा और औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला सोमवार को धमतरी पहुंचे। अपने प्रवास के दौरान उन्होंने जिले में औषधीय पौधों के संरक्षण, संवर्धन और उत्पादन को बढ़ावा देने को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा की।

औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला ने अपनी टीम के साथ नगर निगम पहुंचे, जहां उन्होंने महापौर रामू रोहरा से सौजन्य मुलाकात की।  इस दौरान जिले में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के विषय पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। चर्चा में यह भी बात सामने आई कि, यदि योजनाबद्ध तरीके से औषधीय पौधों का उत्पादन किया जाए तो स्थानीय किसानों और ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार हो सकते हैं।

प्रदेश सरकार औषधियों के संरक्षण के लिए कर रही प्रयास
वहीं औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला प्रेस क्लब धमतरी पहुंचे, जहां प्रेस क्लब परिवार की ओर से उनका स्वागत और सम्मान किया गया। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि, प्रदेश सरकार पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और वन औषधियों के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि धमतरी जिला वन संपदा और जैव विविधता से समृद्ध है, इसलिए यहां औषधीय पौधों के उत्पादन की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को होगी मजबूत
उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला ने कहा कि, आने वाले समय में जिले में औषधीय पौधों की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके तहत किसानों और स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे औषधीय पौधों की खेती अपनाकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें। इससे एक ओर पारंपरिक स्वास्थ्य परंपराओं का संरक्षण होगा, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।