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श्यामकिशोर शर्मा - नवापारा/राजिम। इस शहर का भगवान ही मालिक है। थाना से टीआई को लाइन अटैच कर रवाना कर दिया गया है। इनके जगह नया टीआई नहीं आया है। मतलब पिछले 12-15 दिनों से बिना टीआई के थाना चल रहा है। अभी कार्यभार एसआई सुनील कश्यप संभाले हुए है। बताना लाजिमी होगा कि, नवापारा एक ऐसा शहर है जहां की ट्रैफिक बेलगाम है। इस वजह से रोज छोटी-मोटी दुर्घटना होती है। दुर्घटना का कारण भी साफ है कि, लोग यहां ट्रैफिक रूल की मुताबिक नही, अपने मर्जी से चलते है वो भी तेज रफ्तार में चाहे गाड़ी चार पहिया हो अथवा दोपहिया। 

 कदम-कदम पर खतरा मंडरा रहा 

कब,कौन,कहां पर दुर्घटना का शिकार हो जाएगा? कुछ कहा नहीं जा सकता? रायपुर-देवभोग के लिए नेशनल हाइवे 130 इस शहर के बीच से होकर गया है। सड़क काफी चौड़ी हो गई है, पर स्पीड ब्रेकर एक भी जगह नहीं बनाया गया है। तेज रफ्तार में हर गाड़ियां दौड़ती है। बात यदि पंडित जवाहर लाल नेहरू पुल इंदिरा मार्केट रोड से पंडित दीनदयाल उपाध्याय चौक बस स्टैंड तक की बात करें तो कई तिगड्डा,कैं चीफांस रोड आमने-सामने गई है।

इस चौक में रोज लगता है जाम

इंदिरा मार्केट के ठीक विपरीत दिशा में पारागांव रोड है जो मेन रोड रायपुर-देवभोग को क्रास होता है। सबसे खतरनाक यही प्वाइंट है। क्योंकि देवभोग की ओर से आने वाली गाड़ी एक तो सीधे जाती है जो फुल स्पीड में रहती है और यही इसी प्वाइंट पर कई ऐसे गाड़ियां है जो या तो इंदिरा मार्केट की ओर मुड़ती है या पारागांव की ओर। ठीक यही हाल रायपुर की ओर से आने वाली गाड़ियों का रहता है। यह एक ऐसा चौगड्डा कैं चीफांस सड़क है जहां हर पल जाम तो होता ही है। बल्कि आमने-सामने गाड़ियां भी टकरा जाती है।

बिना टीआई के चल रहा थाना 

इसके कुछ ही दूर मैडम चौक है। इस प्वाइंट में भी बीच सड़क से दो मार्ग कटा हुआ है। कुछ और दूर बढ़ने पर चंपारण चौक कहलाता है। ये तो बहुत ही डेंजर तिराहा है। कौन सी गाड़ी किधर मुड़ेगी इसे कोई नहीं जानता? सिर्फ अचानक पता चलता है कि, गाड़ी इधर से उधर मुड़ेगी। फिर आ जाता है बस स्टेण्ड पंडित दीनदयाल उपाध्याय चौक इस चौक की कहानी ही अलग है। यहां पर भी रोज कुछ न कुछ घटना-दुर्घटना होते ही रहती है। दुर्घटना का प्रमुख कारण पुलिस का न होना और लोगों द्वारा तेज रफ्तार में गाड़ी चलाना है। आखिर रफ्तार में चलने वाली गाड़ियों को नियंत्रण कौन करेगा? 

दुर्घटना को न्योता देते लोग 

थाना से पूछो तो स्टॉफ कम होने का रोना रोते है। बल की कमी बताते है। इसलिए चौक-चौराहे में बल लगा नहीं पाते। ट्रैफिक पुलिस की पोस्टिंग तो यहां है ही नहीं। एक समय था जब बस स्टैंड तिगड्डे में पुलिस जवानों की डयुटी पूरा दिन और देर रात तक लगा रहता था। इससे बेलगाम तेज रफ्तार में चलने वाले वाहन भी पुलिस को देखकर कंट्रोल हो जाता था। वहीं बस स्टैंड में उत्पात मचाने वाले नशेड़ियों में भी लगाम लगता था। 

पुलिस नहीं दे रही ध्यान

शहर के नागरिकों  को यह समझ में नही आता कि आखिर पुलिस डिपार्टमेंट इस शहर के प्रति ध्यान क्यों नही देता? थाना भी शहर से दूर है। पुलिस के जवान तभी दिखेंगे जब कोई व्हीआईपी का आगमन होगा। शहर के भीतर भी ट्रैफिक व्यवस्था बुरी तरह से बिगड़ी हुई है। जगह-जगह रास्ते भर गाड़ियों  का बेतरतीब ढंग से खड़ा होना,मनमर्जी चलना इस शहर के तासीर में शामिल हो गया है। इसलिए भी लोग दुर्घटना का शिकार हो रहे है।