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छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के एएचपी घटक में अफसरों की गंभीर लापरवाही सामने आई है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के एएचपी घटक में अफसरों की गंभीर लापरवाही सामने आई है। विभागीय समीक्षा में खुलासा हुआ है कि आधा दर्जन बड़े निकायों के अफसरों ने पिछले 11 महीने के दौरान जो काम किया, वह भारी असंतोषजनक माना गया है। इस मामले को लेकर नगर निगम आयुक्त जगदलपुर, अंबिकापुर, रिसाली, राजनांदगांव, भिलाई चरौदा और नगर पालिका परिषद कांकेर के सीएमओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। ये भी कहा गया है कि सात दिनों में जवाब नहीं दिया, तो एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी।

ये है मामला
राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के एएचपी घटक के तहत हजारों की संख्या में आवास बनाए जा रहे हैं। केंद्र के सहयोग से चलने वाली यह सरकार की अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना है। केंद्र से लेकर राज्य सरकार लगातार इस योजना के क्रियान्वयन पर नजर रखे हुए है। संबंधित अधिकारियों को बार-बार निर्देश दिए जा रहे हैं कि वे अपने क्षेत्र में समयबद्ध कार्यक्रम के तहत कार्य पूरा करें, लेकिन राज्य के कई निकायों के अफसरों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। जब विभागीय समीक्षा की गई तो पूरी गड़बड़ी सामने आ गई। आवास पूर्ण नहीं हुआ। आबंटन की स्थिति- 462 स्वीकृत आवासों में से केवल 270 (58 प्रतिशत) का ही आबंटन हो पाया है। पिछले 11 महीनों में मात्र 24 आवासों का आबंटन किया गया। पूर्ण हो चुके 346 आवासों में से केवल 83 हितग्राहियों (24 प्रतिशत) का ही व्यवस्थापन किया गया है। पिछले 11 महीनों में यह संख्या मात्र 29 रही।

7 दिनों के भीतर मांगा जवाब
शासन ने इसे कार्य के प्रति घोर लापरवाही और उदासीनता का प्रतीक माना है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि क्यों न इस कृत्य के लिए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के प्रावधानों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। आयुक्त को निर्देशित किया गया है कि वे अपना लिखित प्रतिवाद 07 दिवस के भीतर अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करें। समय सीमा में जवाब प्राप्त न होने पर उनके विरुद्ध नियमानुसार एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी। नोटिस में यह बात सभी छह निकायों के आयुक्त व सीएमओ को लिए कही गई है।

ये है गड़बड़ी की एक कहानी
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव की अध्यक्षता में हुई ऑनलाइन समीक्षा बैठक में यह पाया गया कि शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जगदलपुर नगर निगम की स्थिति संतोषजनक नहीं है। ये पाया गया कि 11 महीनों में इस निकाय ने कोई भी आवास पूरा नहीं किया। इस मामसे में प्रवीण कुमार वर्मा आयुक्त नगर निगम को नोटिस जारी किया गया। कार्य की प्रगति के आंकड़े कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हैं। भौतिक प्रगति की बात करें, तो कुल स्वीकृत 462 आवासों में से केवल 346 पूर्ण हुए हैं (75 प्रतिशत)। चौंकाने वाली बात यह है कि विगत 11 महीनों में एक भी आवास पूर्ण नहीं हुआ। आबंटन की स्थिति- 462 स्वीकृत आवासों में से केवल 270 (58 प्रतिशत) का ही आबंटन हो पाया है। पिछले 11 महीनों में मात्र 24 आवासों का आबंटन किया गया। पूर्ण हो चुके 346 आवासों में से केवल 83 हितग्राहियों (24 प्रतिशत) का ही व्यवस्थापन किया गया है। पिछले 11 महीनों में यह संख्या मात्र 29 रही।

एक ही नहीं, पांच और निकायों में यही हुआ
जगदलपुर नगर निगम आयुक्त ही नहीं राज्य के आधा दर्जन निकायों में भी इसी तरह की गंभीर लापरवाही के मामले सामने आए हैं। इन मामलों में जिन अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें ये अधिकारी शामिल हैं-देव नारायण कश्यप आयुक्त नगर निगम अंबिकापुर, मोनिका वर्मा आयुक्त नगर निगम रिसाली,अतुल विश्वकर्मा आयुक्त नगर निगम राजनांदगांव, दशरथ सिंह राजपूत आयुक्त नगर निगम भिलाई चरौदा, पवन कुमार मोरिया मुख्य नगर पालिका अधिकारी नगर पालिका परिषद कांकेर। इन सभी के खिलाफ जारी नोटिस में मोटे तौर पर ये बात कही गई है कि पिछले 11 महीनों में इनके निकाय में आवास निर्माण का काम संतोषजनक नहीं है। अलग-अलग निकायों में योजना की भौतिक प्रगति, आवंटन की स्थिति, और व्यवस्थापन की स्थिति के आंकड़े संतोषजनक नहीं पाए गए हैं।

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