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मरने के बाद दाह संस्कार में इस्तेमाल किया जाने वाला गोकाष्ठ और कंडा दोनों की कीमत पिछले तीन साल में डेढ़ गुना तक बढ़ गई है।

रायपुर। आज के इस दौर में इंसान का जिंदा रहना जितना महंगा है, उतना ही महंगा अब मरना भी हो गया है। मरने के बाद दाह संस्कार में इस्तेमाल किया जाने वाला गोकाष्ठ और कंडा दोनों की कीमत पिछले तीन साल में डेढ़ गुना तक बढ़ गई है, जिसके कारण दाह संस्कार का खर्च भी डेढ़ गुना तक बढ़ा है। तीन साल पहले गोकाष्ठ से दाह संस्कार कराने में 3100 रुपए ही खर्च करना पड़ता था। यह राशि बढ़कर अब 5100 रुपए तक पहुंच गई है। इसके अलावा दीगर खर्च भी कई गुना बढ़ गए हैं।

लकड़ी की तुलना में गोकाष्ठ-कंडा सस्ता एवं प्रदूषण रहित
लकड़ी की तुलना में गोकाष्ठ और कंडा दोनों काफी सस्ता है। गोकुलनगर में संचालित अग्रवाल सेवा गोधाम के संचालक रितेश अग्रवाल ने बताया कि लकड़ी की तुलना में गोकाष्ठ सस्ता है, साथ ही जलाने में 65 प्रतिशत कार्बन कम छोड़ता है। विशेषज्ञों के रिसर्च में इसका दावा भी किया गया है।

65 प्रतिशत घटा गोकाष्ठ कंडा का उत्पादन
महिला स्वसहायता समूहों के माध्यम से गोकाष्ठ और कंडा का उत्पादन किया जाता था। दाह संस्कार, होलिका दहन, हवन आदि जैसे कार्यक्रम में लकड़ी के उपयोग होता था। यह योजना एक प्रकार से पारंपारिक लकड़ी का सस्ता ईको फ्रेंडली विकल्प के रूप में लाई गई थी। इससे पेड़ तो बचते हैं, साथ ही प्रदूषण भी कम होता है। फिलहाल इनका उत्पादन कम हो रहा है। उसकी वजह से कंडा और गोकाष्ट की कीमत बढ़ी है।

गोकाष्ठ से दाह संस्कार में 5100 खर्च लकड़ी से 5800
गोकाष्ठ से अगर दाह संस्कार किया जाता है, तो इसमें पूरी सेवा के साथ होने वाली खर्च की राशि 5100 रुपए है, वहीं लकड़ी से दाह संस्कार में कुल खर्च 5800 से 6000 रुपए तक आता है। इसमें लगभग 4 हजार रुपए की लकड़ी, 2 सौ रुपए कंडा एवं लगभग 6 सौ से 1 हजार रुपए तक राल आदि का खर्च शामिल है। इस तरह लगभग 58 सौ से 6 हजार रुपए तक दाह संस्कार में खर्च आता है।

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