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संतोष कश्यप- अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से धान खरीदी में बड़ी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। खड़गवां केंद्र में धान के भौतिक सत्यापन के दौरान 5 हजार 7 सौ 28 बोरा धान गायब मिला। धान समिति केंद्र में करीब 72 लाख का 2 हजार 291 क्विंटल धान गायब हो गया है। जिसके बाद खरीदी केंद्र प्रभारी अनिल गुप्ता और ऑपरेटर अनिल भगत को निलंबित कर दिया गया है। मामले की सूचना मिलने के बाद कलेक्टर के निर्देश पर खाद्य अधिकारी की टीम ने छापा मारा है। पूरा मामला मैनपाट ब्लॉक के खड़गवां धान समिति केंद्र का है।
धान खरीदी में हड़ताल बनी थी बाधा
वहीं बीते सप्ताह उठाव केवल 22 मीटरिक टन का हुआ था। करीब 52 मीट्रिक धान अभी भी समितियों में डंप था। इसकी चिंता में धान खरीदी करने वाली समितियां सूख रही थी। मार्कफेड की नीति है कि तीन दिन में धान का उठाव कर लिया जाएगा। लेकिन एक महीने से ज्यादा होने की वजह से सूखत बढ़ रही थी। इसकी वजह से समितियां अघोषित तौर पर किसानों से 40 किलो की जगह 41 या 42 किलो तक धान ले रही थी। कस्टम मिलिंग नीति में मार्कफेड ने खरीदी केंद्रों में 72 घंटे में धान का उठाव का प्रावधान था। मिलर्स से अनुबंध होने के बाद अब उठाव में तेजी आई थी।
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13सौ समितियों में था बफर स्टॉक
धान खरीदी के साथ साथ मिलर्स ने धान का उठाव भी शुरू कर दिया था। अब तक 46.24 लाख मीट्रिक टन धान के उठाव के लिए डीओ और टीओ जारी हो चुका था। वहीं 21.58 लाख मीट्रिक टन धान का उठाव भी हो चुका है। धान खरीदी शुरू होने के बाद करीब तीन सप्ताह तक मिलर्स के साथ अनुबंध नहीं होने के कारण उठाव बाधित रहा। उठाव नहीं होने से राज्य के 2739 खरीदी केंद्रों में से 2000 समितियों में दो से तीन गुना बफर स्टॉक था। कई केंद्रों में खरीदी भी प्रभावित रही। मिलर्स से अनुबंध होने के बाद लगातार उठाव किया जा रहा है। अब केवल 1300 समितियों में बफर स्टॉक है। यहां पर भी स्थिति के अनुसार उठाव कार्य तेजी से किया जा रहा है।
भरारी धान खरीदी केंद्र प्रभारी हटाए गए थे
सेवा सहकारी समिति मल्हार के धान खरीदी केंद्र में बफर लिमिट से अधिक धान खरीदी के बाद अब पिछले 15 दिनों से टोकन कटना भी बंद हो गया था जिससे किसान चिंतित है। बताया जा रहा था कि 12 दिसम्बर से टोकन मिलने की साइट बंद था हालांकि 15 जनवरी तक टोकन कट गया था। कलेक्टर ने मल्हार क्षेत्र के भरारी धान खरीदी केंद्र प्रभारी जगजीवन कुरें को हटाने के निर्देश दिए थे। कुर्रे के विरुद्ध धान खरीदी में गड़बड़ी और लापरवाही के कई आरोप लगे थे।
