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श्यामकिशोर शर्मा। नवापारा-राजिम। छत्तीसगढ़ के नवापारा में शराब की सरकारी दुकान में ओवररेट शराब बेचे जाने पर दो सेल्समेन और एक सुपरवाईजर के खिलाफ एक्शन लिया गया है। इन तीनों कर्मचारी वेंकटेश तिवारी,सूरज सोनवानी,गोवर्धन सुरेंद्र को जिम्मेदार ठहराते हुए सेवा से पृथक कर धारा 39(ग) के तहत मामला बनाकर बर्खास्त किया गया है। लेकिन बड़ी मछलियो को विभाग के जिम्मेदार अफसरो ने बचा दिया है। 

अधिक रेट में बेच रहे शराब 

सोचने वाली बात तो यह है कि, एक मामुली सा सेल्समेन और सुपरवाईजर की इतनी हैसियत नहीं है कि, वे देशी शराब के पौवे में 110 की जगह 120 ले रहे हैं और 220 के बीयर के 250 रूपए ले रहे हैं। आखिर किसके इशारे पर और किसके आदेश पर ये कर्मचारी ऐसा कर रहे थे? और कब से कर रहे थे? ये सवाल पूरे शहर में गुंज रहा है। शराब प्रेमियों और जानकारों की मानें तो शराब दुकान में दादागिरी और गुंडागर्दी इस कदर है कि, छोटा-मोटा कोई आदमी आवाज ही नही उठा सकता। चाहे वे कितनो ही जुल्म क्यो न कर ले? मसलन मन पसंद अंग्रेजी ब्रांड दिया ही नहीं जाता। यदि कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति, नेता, दादा, गुंडा हो तो उन्हें तुरंत मिल जाता है। ओवररेट के मामले में केवल जनसाधारण को ही भुगतना पड़ता है। 

चेतावनी देते आबकारी डीओ

लोगों से शराब दुकान वाले करते हैं मारपीट 

यदि धोखे से भी कोई रेट पुछ ले तो उनके हाथ से सीसी या बॉटल को वापस मांगकर वहीं पटक दिया जाता है और कहा जाता है कि जाओ दारू नहीं है। जिसको बताना है बता दो और जो करना है कर लो। थोड़ा सा बहस किए तो वहां ग्राहको के साथ मारपीट और पिटाई भी की जाती है। राष्ट्रीय पर्व और शुष्क दिवस में ये चांदी तो काटते हैं। गैर शादी, ब्याह, मेला, मड़ई होली, दीपावली जैसा पर्व हो गया तो मत पूछो कि, ये अपनी मर्जी का रेट लेते है और ग्राहक मेले की तरह भीड़ देखकर जिस रेट में मिलता है। उसी रेट में लेकर खुशी-खुशी लौट आते है। ये सारे दृश्य शराब दुकान में देखने को कभी भी मिल जाता है। सभ्रांत व्यक्ति की बात करे तो वे हुज्जत करना पसंद ही नही करते क्योंकि लोग उसे जान जाएंगे। इस डर से वे पैसा देते है और शराब लेकर वापस लौट आते है। इस शहर में कई किस्से कहानियां है। 

लोग बोले- पुलिस की भी है संलिप्तता 

इस पूरे मामले में शराब दुकान और स्थानीय पुलिस का चोली-दामन का संबंध है। शराब दुकान वाले से पंगा लिए तो समझो एफआईआर और झूठे केस में भी फंसना तय है। इसलिए लोग न तो पुलिस के झमेले में फंसना चाहते है और न ही शराब दुकान वालो से पंगा लेते है। यहां का पैसा ऊपर तक जाता है। नवापारा का कारोबार 50 से 70 पेटी का बताते है। अब रविवार की घटना की बात करे तो बीजेपी के नेता किशोर देवांगन, प्रसन्न शर्मा दल-बल के साथ शराब दुकान पहुंचे। वहां उन्होंने लोगो की शिकायत को अपने स्तर पर तहकीकात की और उसके बाद रायपुर के बड़े अफसरों को फोन लगाकर इस पुरे मामले से अवगत कराया। 

बीजेपी नेताओं की शिकायत के बाद हुई कार्रवाई 

भाजपा नेताओंं के प्रभाव और ओवररेट की पुष्टि को देखते हुए बड़े अफसरों ने केवल तीन लोगों के खिलाफ कार्रवाई किया है। जिसे पर्याप्त नही समझा जा रहा है। इस संबंध में जिले के वरिष्ठतम अधिकारी डीओ विकास गोस्वामी ने रविवार को भाजपा नेताओं से साफ-साफ कहा था कि, इसमें जो भी इन्वाल्मेंट पाए जाएंगे। नीचे से ऊपर तक सबके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मगर यहां के जिम्मेदार निरीक्षक के ऊपर जरा सी आंच भी नही आई। ये ओवररेट की शिकायत केवल रविवार की नही है. बल्कि जब से इस निरीक्षक ने यहां कार्यभार ग्रहण किया है तब से ओवर रेट बदस्तुर चल रहा है। नेता और प्रशासनिक अधिकारी चुनाव में व्यस्त हो गए। इसका पूरा-पूरा फायदा निरीक्षक के निर्देश पर ओवररेट का काम जारी रहा। 

आबकारी डीओ दी थी चेतावनी

कल चर्चा के दौरान आबकारी डीओ श्री गोस्वामी ने साफ-साफ कहा था कि, नीचे से ऊपर तक सभी अधिकारी-कर्मचारियो के खिलाफ कार्रवाई होगी। परंतु अपने दफ्तर से एडीओ श्री पैकरा,विभाग के इंस्पेक्टर नीलम स्वर्णकार और अन्य को नवापारा भेजे। यहां आकर इस टीम ने जो भी रिपोर्ट हेड ऑफिस में दिया होगा उसके मुताबिक तीन लोगो को बर्खास्त किया गया है जबकि इंस्पेक्टर इसलिए जिम्मेदार है कि उनके कार्यक्षेत्र के दुकान में ओवररेट का मामला प्रमाणित हुआ है इसलिए उसे भी दोषी माना जा रहा है। इस संबंध में सोमवार को डीओ श्री गोस्वामी और इंस्पेक्टर नीलम स्वर्णकार को फोन लगाया गया तो उन्होने फोन रिसीव्ह नहीं किया। 

शिकायत के बाद तुरंत हुआ एक्शन 

ओवर रेट की शिकायत सही पाए जाने के बाद श्री देवांगन ने आबकारी विभाग के अधिकारियों और शराब दुकानों में कर्मचारियों की नियुक्ति करने वाले ठेकेदार से मोबाइल पर चर्चा कर दो-टूक चेतावनी दी कि, दोषी कर्मचारियों के विरुद्ध तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाए। अन्यथा वे शासन-प्रशासन के उच्च स्तर पर उनकी शिकायत करेंगे। देवांगन की चेतावनी का असर रहा कि, कुछ घंटे के भीतर क्षेत्र की आबकारी अधिकारी ने दोनों शराब दुकान पहुंचकर जांच करते हुए देशी शराब दुकान के सेल्समेन सूरज सोनवानी, गोवर्धन सुरेंद्र और विदेशी शराब दुकान के सुपरवाइजर वेंकटेश तिवारी को ओवररेट में शराब बेचने का दोषी पाया। इसके बाद उनके विरुद्ध आबकारी अधिनियम के तहत प्रकरण कायम कर उन्हें तत्काल सेवा से पृथक कर दिया गया। 

सवाल वही, कौन है मास्टर माइंड 

यहां बड़ा सवाल यह है कि, नगर की दोनों शराब दुकानों में ओवर रेट का खेल पिछले कई महीनो से चलते आ रहा है। लेकिन इसके बावजूद क्षेत्रीय आबकारी अधिकारी और ठेकेदार को इसकी भनक न लगना, गले नहीं उतर रहा है। आखिर महीनों से ओवर रेट से कमाए गए लाखों रुपए किस-किस की जेब में जा रहे थे और इस पूरे खेल के पीछे मास्टरमाइंड कौन है? इस सवाल का जवाब आना अभी बाकी है।