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इमरान खान- नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के दूसरे सबसे बड़े नक्सल एनकाउंटर के पांच दिन बाद जिला मुख्यालय नारायणपुर में नक्सलियों का शव लेने परिजन पहुंच रहे हैं। लेकिन उस वक्त असमंजस की स्थिति वपैदा हो गई जब एक ही महिला नक्सली के शव के दो दावेदार सामने आ गए। महिला नक्सली के शव को लेकर दो परिवारों में भ्रम की स्थिति बन गई, दोनों परिवारों के सदस्यों ने दावा कर मृत महिला नक्सली कमली को अपनी बेटी बताया। एक परिवार बर्थ निशान के आधार पर दावा कर रहा था तो दूसरा पुलिस द्वारा जारी मृत नक्सलियों की फोटो को देखकर अपनी बेटी बता रहा था। 

घंटों कश्मकश के बाद एक परिवार मायूस लौटा

जिला अस्पताल के पोस्टमार्टम रूम के बाहर इसे लेकर घंटों तक कश्मकश के बाद सुकमा से आया परिवार मायूस होकर लौट गया। इस बीच एक हैरान करने वाली तस्वीर भी आई। लापता बेटी की तस्वीर लेकर एक मां बेबस होकर इधर-उधर देख रही थी। पुलिस कर्मियों से मोबाइल की तस्वीर दिखाने का आग्रह करते इनका परिवार बेटी की तस्वीर मुठभेड़ की तस्वीर से मिलाता और शिनाख्ती करता रहा। 

दो परिवार, दोनों की कहानी एक ही जैसी

आंखों में आंसू झलकते इस परिवार की दस्तां भी काफी कष्टदायक है। उनकी बेटी की शादी की बात हुई तो वह नाराज हो गई। मां और पिता ने दो थप्पड़ मार दिया तो वह नाराज होकर घर छोड़कर चली गई थी। इसी प्रकार कमली को लेकर दावा करने आया एक और परिवार की कहानी भी इनकी कमली से मिलती है। इसके पिता ने बताया कि 12 साल पहले जब बेटी की शादी की बात हुई तो वह नाराज होकर घर छोड़कर चली गई। 5 साल पहले वह घर आई थी लेकिन संगठन का मोह नहीं त्याग पाई। बताते हैं कि हार्डकोर नक्सली हिड़मा की कंपनी के साथ उनकी बेटी नक्सली संगठन में शामिल होकर परिवार से दूर रह रही थी।

चार महीने में मारे गए 96 नक्सली 

सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद फोर्स लगातार नक्सलियों के आधार इलाके में घुसकर स्ट्राइक कर रही है। चार माह के अंतराल में 96 नक्सली मारे गए हैं। इनके शव को लेकर परिजनों में असमंजस्य की स्थिति बन रही है। नक्सली संगठन के नाम और घर के नाम की वजह से मृत नक्सलियों के परिजनों की मुश्किलें बढ़ गईं। मारे गए सभी दस नक्सलियों का पोस्टमार्टम कर सात परिवार को शव सुपुर्द कर दिया गया है।