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रायपुर। छत्तीसगढ़ में विदेशी शराब की थोक खरीदी के लिए लाइसेंसी-व्यवस्था को समाप्त करते हुए शराब निर्माताओं से सीधे शराब की खरीदी करने का निर्णय लिया गया है। सरकार के इस निर्णय पर शराब कारोबारी कोर्ट जा सकते हैं, इसे देखते हुए आबकारी विभाग ने हाईकोर्ट में कैविएट दायर किया है। राज्य सरकार ने सीधे शराब निर्माताओं से शराब की थोक खरीदी के लिए छत्तीसगढ़ ब्रेवरेज कार्पोरेशन को जिम्मेदारी दी है। कैबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णय के बाद राज्य शासन की ओर से इस मामले में कोर्ट कैविएट दायर कर दिया है। फैसले पर शराब कारोबारी रोक लगाने कोर्ट का रुख कर सकते हैं। राज्य शासन का कहना है कि शराब के कारोबार को भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी बनाने के लिए ऐसा निर्णय लिया गया है।

 शराब खरीदी-बिक्री के प्रकरणों में कांग्रेस सरकार पर लगे भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोपों की जांच शुरू कर दी थी। पिछली सरकार पर जिन घोटालों के गंभीर आरोप लगे थे, उनमें शराब घोटाला प्रमुख था। कांग्रेस की तत्कालीन सरकार ने पिछली भाजपा सरकार द्वारा बनाई गई आबकारी नीति में संशोधन कर एफएल-10 लाइसेंस का नियम बनाया और अपनी चहेती फर्मों को सप्लाई का जिम्मा दे दिया, इससे राज्य में जहां अवैध शराब, नकली शराब की बिक्री धड़ल्ले से होने लगी, वहीं नकली होलोग्राम, बोतलों की स्कैनिंग किए बिना घटिया शराब बेची गई। राज्य सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ। राज्य सरकार ने शराब की खरीदी बिक्री को पारदर्शी बनाए रखने यह निर्णय लिया है।

कई कारोबारी इस काम में लगे थे

छत्तीसगढ़ विदेशी शराब के कारोबार में कई कारोबारी लगे थे। सरकार के इस फैसले से उन्हें करोड़ों का नुकसान संभव है। ऐसे में उन कारोबारियों द्वारा मामले को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। मामले में याचिका स्वीकार करने से पूर्व सरकार का पक्ष सुना जाए, उसे लेकर कैविएट लगाया गया है। नए वित्तीय वर्ष के बाद शराब के कारोबार में विदेशी शराब की सप्लाई बेवरेज कार्पोरेशन के माध्यम से लाइसेंसी कारोबारियों से खरीद कर की जा रही थी। कई ब्रांड नहीं मिल रहे थे। वही बांड भी उपलब्ध होता था, जो लाइसेंसी द्वारा सप्लाई की जा रही थी।

पुरानी व्यवस्था फिर लागू

विदेशी शराब की खरीदी के लिए पूर्ववर्ती भाजपा सरकार की पुरानी व्यवस्था को फिर से लागू कर दिया गया है। इसके तहत विदेशी शराब की खरीदी एजेंसी द्वारा की जाएगी और उसी की आपूर्ति शराब कांउटरों पर की जाएगी। उपभोक्ताओं को इससे गुणवत्तापूर्ण उत्पाद के साथ अपनी पसंद के ब्रांड के उत्पाद उपलब्ध होंगे।