बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के 5,000 से अधिक सरकारी स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय न होने पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने इसे छात्राओं के साथ उत्पीड़न और स्कूल छोड़ने का बड़ा कारण मानते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव से विस्तृत रिपोर्ट (शपथ पत्र के साथ) मांगी है। कोर्ट ने कहा कि यह मामला राज्य में स्वच्छ शिक्षा के माहौल पर सवाल उठाता है। शिक्षा सचिव ने शपथ पत्र में सभी स्कूलों में कहा कि टायलेट बनाए जा रहे हैं जो जल्द पूरे होंगे। इसके साथ ही कोर्ट ने बिलासपुर के सिरगिट्टी स्कूल में बदहाली और बीच मैदान में सरिया छोड़ने के कारण हो रही परेशानी पर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से जवाब मांगा है।
हरिभूमि ने इस मामले को उठाते हुए बताया था। कि प्रदेश के पांच हजार से अधिक स्कूलों गर्ल्स टायलेट नहीं है तो 8 हजार से अधिक स्कूल ऐसे हैं जहां शौचालय की स्थिति बेहद खराब है। इससे बच्चे और शिक्षक त्रस्त हैं और लगातार स्कूल शिक्षा विभाग से इसकी मांग कर रहे हैं। इसका खामियाजा बच्चों और शिक्षकों को यूरिन इन्फेक्शन के रूप में भुगतना पड़ रहा है। बिलासपुर जिले की बात करें तो 160 से अधिक स्कूलों में टॉयलेट की बड़ी समस्या है। 200 से ज्यादा ऐसे विद्यालय है, जहां टायलेट तो हैं, लेकिन उपयोग के लायक नहीं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि लड़कियों के लिए अलग शौचालय नहीं हैं होना बेहद गंभीर स्थिति है। हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि लड़कियों के लिए अलग और कार्यात्मक शौचालयों की अनुपस्थिति अनुपस्थिति और स्कूल छोड़ने की दर में वृद्धि का कारण बन रही है। कोर्ट ने कहा कि समाचार रिपोर्ट से पता चलता है कि राज्य के स्कूलों में शौचालयों स्थिति में संतोषजनक सुधार नहीं हुआ है, जिससे छात्राओं का रोजमर्रा का जीवन बहुत मुश्किल हो रहा है।
स्कूलों में छात्राओं की संख्या 19.54 लाख
गौरतलब है कि अगर पिछले वर्ष स्कूलों के युक्तियुक्तकरण के दौरान मर्जर से प्रदेश में गर्ल्स टॉयलेट स्कूलों की संख्या बढ़ गई। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की यू-डाइस रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार छत्तीसगढ़ में 48757 सरकारी स्कूल संचालित थे। इनमें 37.64 लाख विद्यार्थी हैं। इनमें छात्राओं की संख्या 1954 लाख है। युक्तियुक्तकरण के बाद स्कूलों की संख्या घटकर 38 हजार हुई। लिहाजा बिना गर्ल्स टॉयलेट वाले 5500 स्कूलों में से अभी भी एक हजार से अधिक स्कूलों में गर्ल्स टॉयलेट नहीं है।
नया बनाने के साथ ही मरम्मत का कार्य जारी
शिक्षा सचिव ने शपथ पत्र में माना कि बिलासपुर, रायपुर, कोरबा, बस्तर और जांजगीर-चांपा के स्कूलों में गर्ल्स टॉयलेट की सबसे अधिक कमी है। साथ ही विभागीय निर्देशों के बाद जिन स्कूलों में टॉयलेट जर्जर या अनुपयोगी स्थिति में हैं, वहां मरम्मत शुरू कर दी गई है। ध्यान रहे कि राज्य की बात करें तो यहां संचालित 56 हजार 615 स्कूलों में से 54 हजार 715 में लड़कियों के लिए टॉयलेट तो हैं, लेकिन 52 हजार 545 टॉयलेट ही उपयोग करने की दशा में है। वहीं, छात्रों के लिए भी ऐसी ही स्थिति है, इनके लिए 53 हजार 142 स्कूलों में टायलेट तो हैं, लेकिन 49 हजार 355 चल रहे हैं। यानी 4070 स्कूल में गर्ल्स के लिए और 7260 में ब्वॉज के लिए नहीं है।
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