Logo
धमतरी जिले के निरई माता मंदिर में चैत्र नवरात्रि के पंचमी के दिन हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। यहां बिना तेल के ज्योति 9 दिनों तक जलती है।  

अंगेश हिरवानी- नगरी। छत्तीसगढ़ की आस्था और रहस्यों से जुड़ा निरई माता मंदिर एक बार फिर चर्चा में है। धमतरी जिले के सिहावा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत मगरलोड ब्लॉक के अंतिम छोर पर ग्राम मोहेरा के समीप एक छोटा सा गांव के पास निरई पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर में चैत्र नवरात्रि पर हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।

मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को पत्थरों से भरे कच्चे रास्तों से होकर ऊंची पहाड़ी चढ़नी पड़ती है। कठिन मार्ग के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ और वे नारियल व अगरबत्ती चढ़ाकर माता से मनोकामना मांगते नजर आए। निरई माता मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां का दरबार साल में केवल एक बार, चैत्र नवरात्रि के पहले रविवार को ही खुलता है। वह भी सुबह 4 बजे से 9 बजे तक, यानी मात्र 5 घंटे के लिए। इस दौरान दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। 

बिना तेल के जलती है ज्योति 
मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, यहां चैत्र नवरात्रि में प्रज्ज्वलित होने वाली ज्योति बिना तेल के लगातार 9 दिनों तक जलती रहती है। यह रहस्य आज भी लोगों के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है। मंदिर की परंपरा के अनुसार, यहां महिलाओं के प्रवेश पर रोक है। केवल पुरुष ही मंदिर में प्रवेश कर पूजा-अर्चना कर सकते हैं। महिलाओं द्वारा प्रसाद ग्रहण करना भी वर्जित माना जाता है। यहां अन्य देवी मंदिरों की तरह सिंदूर, कुमकुम या श्रृंगार अर्पित नहीं किया जाता। श्रद्धालु केवल नारियल और अगरबत्ती चढ़ाकर माता की पूजा करते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु बकरों की बलि अर्पित करते हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। 

मंदिर में लगता है श्रद्धालुओं का तांता 
ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर परिसर में पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है। शराब सेवन या अनुचित आचरण के साथ प्रवेश करने वालों को माता के प्रकोप का सामना करना पड़ सकता है। निरई माता मंदिर आस्था, रहस्य और परंपराओं का अद्भुत संगम है, जहां श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है।

7