एनिशपुरी गोस्वामी- मोहला। छत्तीसगढ़ के मोहला, मानपुर- अंबागढ़, चौकी जिले में दो- दो टाइगर की आमद देखने को मिली है। औधी क्षेत्र के नवागढ़ घोटिया कक्ष क्रमांक के 1080 में टाइगर के द्वारा एक बछिया के शिकार किए जाने और ट्रैक कैमरा में कैद होने के सिलसिले के बीच बीते 27 फरवरी से एक और बाघ की चहलकदमी और शिकार कि वारदात सामने आई है। औधी क्षेत्र में बीते 3 महीनों के भीतर दो-दो शेर के चहलकदमी की पुष्टि के साथ डीएफओ दिनेश पटेल के निर्देश में शेरो से आम ग्रामीणों को सतर्क रहने और जंगल के राजा को सुरक्षित विचरण के लिए फॉरेस्ट अमला फरमान जारी किया है।
उल्लेखनीय कि, वन विभाग की टीम को एक खूंखार वन्य जीव शेर की चहल कदमी की खबर के साथ-साथ एक बछिया के शिकार करने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही डीएफओ दिनेश पटेल के निर्देश में वन अमला एक्टिव हुआ मौका मुआयना के दौरान घटनास्थल से शिकार किया गया। मृत गाय के साथ शेर का पद चिन्ह देखा गया है। फॉरेस्ट विभाग ने बाघ के आमद वाले क्षेत्र में एतिहाद बरतते हुए आम ग्रामीणों को एक दूसरे के संघर्ष के लिए सतर्कता के साथ ही टाइगर से किसी प्रकार से छेड़छाड़ ना करने और अकेले जंगल नहीं जाने की हिदायत दी जा रही थी। इसी दौरान बीते 27 फरवरी से जिले के औंधी क्षेत्र के बागडोंगरी-मरकाटोला इलाके में एक और बाघ की लगातार मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
बैल और इंसान पर किया हमला
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बीते 27 फरवरी से औधी तहसील के अंदरूनी हिस्से में दूसरे नंबर के शेर ने अपने विचारण के साथ-साथ तीन पालतू पशुओं का शिकार कर चुका है। 6 मार्च शुक्रवार दोपहर एक बैल पर हमला करने के बाद शाम करीब पांच बजे खेत में काम कर रहे एक किसान पर बाघ ने झपट्टा मार दिया। किसान ने सूझबूझ दिखाते हुए पास के पेड़ पर चढ़कर किसी तरह अपनी जान बचाई है।
बाघ की मौजूदगी से ग्रामीणों में डर
जिले के औधी क्षेत्र में 27 फरवरी से एक और बाघ के मूवमेंट की जानकारी मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बाघ के डर से लोग जंगल जाना कम कर दिए हैं। इससे महुआ, चार और अन्य वनोपज संग्रहण का सीजन प्रभावित हो रहा है, जो कई परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन है। ग्रामीणों ने वन विभाग से बाघ से सुरक्षा की मांग की है।
वनमंडलाधिकारी ने दी जानकारी
वनमंडलाधिकारी दिनेश पटेल ने हरिभूमि को बताया कि जिले मे दो- दो बाघ की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। दूसरे नंबर का यह बाघ जिले की वांछिद जंगल से निकालकर अबादी क्षेत्र में पहुंचा है। बाघ की पहचान के लिए ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। हालांकि अभी तक स्पष्ट तस्वीर या पगमार्क नहीं मिल पाया हैं।
बच्चों की पढ़ाई पर भी हो रहा असर
क्षेत्र के कई गांवों के बच्चों को पढ़ाई के लिए रोजाना करीब पांच किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाना पड़ता है। बाघ की मौजूदगी की खबर से अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल और खेतों से होकर गुजरने वाले रास्तों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन को विशेष व्यवस्था करनी चाहिए।
शेरो को जंगल में स्वतंत्र रखने के लिए विभाग ने झोंकी ताकत
जिले में जंगली हाथियों के दंगल के साथ-साथ तेंदुआ, भालू, जंगली सूअर, लोमड़ी, लकड़बग्घा का आबादी में विचरण के साथ-साथ इनके द्वारा शिकार करने की खबरें मिलती रहती है। इस बार औधी क्षेत्र के नवागढ़ बाघडोगरी क्षेत्र में 3 महीने के भीतर दो-दो शेर होने की पुष्टि हुई है। डीएफओ दिनेश पटेल के निर्देश में जान माल की रक्षा के लिए वन विभाग की तरफ से सतर्कता बरतने मुनियादी कर रहा है।