सार्थक संवाद : बस्तर को नक्सलमुक्त करेंगे, नक्सली सरेंडर करें या उन्हें गोली का जवाब गोली से मिलेगा

Exclusive: प्रदेश सरकार [छत्तीसगढ़] के एक साल पूरे होने पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से हरिभूमि और आईएनएच के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी की ख़ास बातचीत।

Updated On 2024-12-10 12:11:00 IST
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से डॉ.हिमांशु द्विवेदी का सार्थक संवाद

रायपुर। बस्तर का हर वर्ग चाहता है कि नक्सलवाद से मुक्ति मिले। हमारी सरकार भी नक्सलवाद से बस्तर को मुक्त कराने की दिशा में काम कर रही है। बस्तर वासियों का सपना हमारी सरकार जरूर पूरा करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त कराने की योजना है। इस पर काम हो रहा है। नक्सली या तो हथियार काम हो रहा है। नक्सली या तो हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटें, नहीं तो उनकी गोली का जवाब गोली से भी दिया जाएगा। मुख्यमंत्री से हरिभूमि और आईएनएच के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने प्रदेश सरकार के एक साल पूरे होने पर सार्थक संवाद किया। प्रस्तुत है पूरी बातचीत।

कैसा बीता एक साल?
एक साल कैसे बीत गया पता ही नहीं चला। कितना लंबा समय देखते-देखते बीत गया। हमारी चिंता तो मोदी की गारंटी को पूरा करने पर थी। 2023 के विधानसभा चुनाव में हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो वादा किया था छत्तीसगढ़ की जनता से, छत्तीसगढ़ की जनता ने मोदी की गारंटी पर विश्वास करके भाजपा को जीत दिलाई और सरकार बनाने का मौका दिया। हमारी भी जिम्मेदारी थी कि मोदी की गारंटी को पूरा करें और जनता के विश्वास पर खरे उतरे। हमने वादा किया था जब सरकार बनेगी तो सबसे पहले जो 18 लाख गरीब पीएम आवास से वंचित रह गए हैं, उनको आवास देने का काम करेंगे। हमारी सरकार बनने के बाद हमारी सरकार ने यही काम सबसे पहले किया। 13 दिसंबर को शपथ लेने के बाद 14 दिसंबर को पहली कैबिनेट में 18 लाख आवास की स्वीकृति दी। 8 लाख 46 हजार आवासों की एक साल में मंजूरी भी केंद्र सरकार से मिल गई है। बस्तर का नक्सल पीड़ित इलाका है, वहां के लिए भी अलग से 15 हजार पीएम आवास की मंजूरी मिली है। नगरी क्षेत्र के लिए 15 हजार आवास की अलग से स्वीकृति मिल गई है। ऐसे में हमने पीएम का पहला वादा पूरा किया। इसके बाद किसानों से वादा था दो साल का बकाया बोनस देना का, उसको भी हमने बीते साल 25 दिसंबर को दे दिया। 21 क्विंटल धान खरीदी का वादा भी पूरा किया। अंतर की राशि भी एक मुश्त देने का काम किया। तेंदूपत्ता का भी वादा था। उसको चार हजार से बढ़ाकर साढ़े पांच हजार प्रति बोरा देने का वादा भी हमारी सरकार ने पूरा किया है। राम लला दर्शन योजना प्रारंभ की। अब तक 20 हजार इसका लाभ ले चुके हैं। पीएससी घोटाले की सीबीआई जांच की बात की गई थी, उसको भी पूरा किया है। अब दोषी जेल भी जाने लगे हैं। ये सब करते- करते कैसे एक साल पूरा हो गया, पता ही नहीं चला।

विधानसभा चुनाव में एक समय लग रहा था भाजपा की सरकार नहीं बन पाएगी, फिर ये कैसे संभव हो गया?
विधानसभा चुनाव के छह माह पहले तक यही लगता था कि भाजपा की सरकार बनना मुश्किल है। कांग्रेस को भी अतिआत्मविश्वास था। हमारे राष्ट्रीय नेताओं ने उत्साह का संचार किया कार्यकर्ताओं में। कांग्रेस ने जो वादे 2018 में किए थे, पांच साल में एक भी वादा पूरा नहीं किया था। उसका भी परिणाम रहा कि जनता ने कांग्रेस को नकार दिया। जनता को केंद्र की मोदी सरकार पर भी विश्वास था। जनता यह समझ गई थी कि अगर छत्तीसगढ़ का विकास होगा तो भाजपा के शासन में ही होगा। कांग्रेस सरकार के पांच साल में छत्तीसगढ़ भ्रष्टाचार का गढ़ बन गया था। हर चीज में भ्रष्टाचार हो रहा था। कोयला में, रेत में, शराब में डीएमएफ की राशि में भ्रष्टाचार। जब जांच प्रारंभ हुई तो कांग्रेस के नेता भी जेल जाने प्रारंभ हो गए। सब जनता के सामने हो रहा था। इन सबका लाभ भी भाजपा को मिला।

नक्सल मोर्चे पर एक साल में मिली सफलता हैरत में डालती है, क्या ऐसा कर रहे हैं, कुछ बताएंगे?
भाजपा की सरकार जब पहले 15 साल थी, तब भी नक्सलवाद के साथ मजबूती से लड़े। इसके बाद जब पांच साल तक कांग्रेस की सरकार थी तो ऐसा सुनने में आता था नक्सली बोलते थे हमारी सरकार आ गई है। हम लोग सरकार में आए तो दिसंबर में शपथ लेने के बाद जनवरी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ आए, हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने संकल्प लिया कि आने वाले मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद समाप्त करना है। उनका मार्गदर्शन मिल रहा है। हमारे जवान बड़ी मुस्तैदी से नक्सलियों से लड़े। एक साल में ही दो सौ से ज्यादा नक्सलियों को मार गिराया गया है। डेढ़ हजार से ज्यादा ने या तो आत्मसमर्पण किया है या उनकी गिरफ्तारी हुई है। हमने आव्हान भी किया है नक्सलियों से हथियार छोड़कर मुख्यधारा से जुड़े, सरकार आपकी मदद करेगी। उसका भी लाभ हुआ है। अगर नक्सली गोलीबारी की ही बात करेंगे, तो उसका भी जवाब देंगे। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए सरकार जिस तरह से काम कर रही है, उसके भी नक्सली आत्मसमर्पण करने के लिए आगे आ रहे हैं।

आदिवासी मुख्यमंत्री बनने के बाद क्या आदिवासियों का सरकार पर भरोसा बढ़ा है और नक्सलियों से भरोसा टूटा है?
हम लोगों ने वहां पर एक प्रयोग किया है नियद नेल्ला नार योजना प्रारंभ की है। ये गोढ़ी भाषा है, इसको हिंदी में कह सकते हैं आपका अच्छा गांव। इसके तहत हम लोग सरकार की योजनाओं को पहुंचा रहे हैं। 37 सुरक्षा कैंप खुल गए हैं। आज % से ज्यादा ऐसे गांव है, जो नियद नेल्ला नार योजना के तहत हैं। एक साल में यहां पर बिजली, पानी सड़क का काम हुआ है। जो स्कूल बंद थे, उनको भी खुलवाने का काम किया है। वहां के युवा नक्सलवाद से मुक्ति चाहते हैं और विकास की मुख्य धारा से जुड़ना चाहते हैं। ऐसे में हम लोगों ने एक और प्रयास किया है वहां पर बस्तर ओलंपिक के आयोजन का। जब इसके लिए योजना बनाई गई तो सोच रहे थे यह कितना सफल होगा, लेकिन आश्चर्य हुआ बस्तर ओलंपिक के लिए एक लाख 65 हजार ने पंजीयन कराया। इसमें महिलाएं और पुरुषों की संख्या लगभग बराबर है। इसमें भाग लेने वालों की उम्र 18 से 35 साल की है। समापन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आने वाले हैं। इससे साफ है कि बस्तर के लोग नक्सलवाद से मुक्ति चाहते हैं और मुख्यधारा से जुड़ना चाहते हैं।

नई उद्योग नीति लांच की है, उससे क्या उम्मीद है?
नई उद्योग नीति लाए हैं, इसको बनाने से पहले सभी वर्गों से रायशुमारी की गई है। ठोक बजा कर यह नीति लाए हैं। इसमें महिला उद्यमी, एससी, एसटी उद्यमी, दिव्यांग उद्यमी, अग्निवीर के लोग भी शामिल हैं। रिटायर सैनिक भी हैं। जो रोजगार देंगे, उनको सरकार ज्यादा सुविधा देगी। सिंगल विंडो सिस्टम भी है। दो तीन दिन पहले एक इन्वेस्टर मीट की गई, इसमें 27 परिवार के लोगों ने 35 हजार करोड़ से ज्यादा के निवेश की मंजूरी दी है। विशेष कर स्टील, पॉवर और ग्रीन एनर्जी के सेक्टर में उन्होंने रुचि दिखाई है।

नया रायपुर की क्या हालत है, कुछ उम्मीद है?
नई राजधानी जो वहां पर बसा रहे हैं, हमें लगता है वह देश की सबसे अच्छी राजधानी होगी। थोड़ा समय लग रहा है, लेकिन वहां पर मंत्रालय, मुख्यमंत्री, मंत्रियों के आवास बन गए। हमारे अलावा कई मंत्री भी वहां रहने लगे हैं। वहां पर आईटी हब भी बनाने की योजना है।

महतारी वंदना योजना कितनी भारी पड़ रही है?
महतारी वंदन योजना चल रहे हैं, हर माह 70 लाख महिलाओं को पैसा दे रही है। इसे महिलाओं का सशक्तिकरण हो रहा है। एक गांव हैं जहां की महिलाएं महतारी वंदन से चंदा करके राम मंदिर का निर्माण कर रही हैं। एक महिला ने सब्जी भाजी की खेती प्रारंभ कर दी है।

मंत्रिमंडल में अनुभवहीन चेहरे ज्यादा हैं, कितना मुश्किल जा रहा है सरकार चलाना?
हमारे मंत्रिमंडल में नए चेहरे बहुत हैं, लेकिन अनुभवहीन नहीं हैं। कई पदों पर रहे, संगठन के काम भी किए। सरकार चलाने में लाभ हो रहा है, युवा हैं, ज्यादा दिक्कत नहीं हो रही है।

मंत्रिमंडल में बदलाव की कोई जरूरत महसूस करते हैं क्या?
मंत्रिमंडल में दो स्थान बचे हैं। देर सवेर दो मंत्री बनेंगे। जहां तक बदलाव का सवाल है को परिवर्तन तो सतत प्रक्रिया है, भाजपा में वरिष्ठ नेताओं से सलाह करके फैसला होता है।

एक साल में क्या अनुभव रहा, ज्यादा परेशान कौन कर रहा है अपनी पार्टी के लोग या फिर सामने वाली पार्टी के लोग?
कोई परेशान नहीं कर रहा है। विपक्ष से यही कहना है कि उनको सकारात्मक विपक्ष की राजनीति करनी चाहिए। सरकार की जो गलती दिखती है, उसको अच्छी तरह से जनता के सामने लाना चाहिए लेकिन ओछी राजनीति नहीं करनी चाहिए।

एक साल में आपने भूपेश बघेल को परेशान किया या फिर उन्होंने आपको परेशान किया है?
हमको कोई परेशानी नहीं है, ये लोग अपने अंतर्कलह में उलझे हुए हैं, हमें लगता है जिस तरह से विपक्ष का रोल होना चाहिए, उसको ठीक से निभा नहीं पा रहे हैं। डॉ. चरण दास महंत का जहां तक सवाल है जो वे बड़े सज्जन आदमी हैं। सब साथ में काम कर चुके हैं। 90 से हम उनको देख रहे हैं।

आपके जशपुर को एक साल में क्या मिला?
बहुत कुछ मिला है, छत्तीसगढ़ नहीं बना था तो पहले पूरा छत्तीसगढ़ ही उपेक्षित था, कांग्रेस को काफी समर्थन मिलता था छत्तीसगढ़ से पर छत्तीसगढ़ के लिए कुछ नहीं हुआ। पहले वनवासी क्षेत्र में कुछ नहीं होता था, बच्चे तो भूख से मर भी जाते थे। भाजपा सरकार आई तो सस्ते अनाज की व्यवस्था डॉ. रमन सिंह ने की। उनको चाऊर वाले बाबा भी कहा जाता है। तब से कोई भूख से तो नहीं मर रहा है। अब भूख नाम की चीज नहीं है। जशपुर का विकास भी बहुत हुआ है। प्रधानमंत्री ने भी आदिवासी क्षेत्रों के लिए पीएम जन योजना प्रारंभ की है, उसका लाभ भी मिलता है। पीएम आवास योजना सहित कई योजनाएं हैं जिनका लाभ मिल रहा है। जशपुर में एक बड़ा 230 बिस्तर वालों अस्पताल बनाने की योजना है, उसकी मंजूरी भी हो गई है। बिजली के क्षेत्र में भी काम हो रहा है। तीरंदाजी की भी अकादमी वहां पर प्रारंभ करने वाले हैं। सभी तरह के विकास के काम हो रहे हैं।

आपकी कितनी जिंदगी बदल गई मुख्यमंत्री बनने के बाद?
बदलाव काफी आ गया है। प्रदेश का मुख्यमंत्री होना बड़ी बात है, उसमें समय भी बहुत देना पड़ता है। कई-कई दिनों तक घर परिवार वालों से बात भी नहीं हो पाती है। लेकिन खुशी होती है, जनता के आंसू पोछ पाते हैं। किसी की मदद करते हैं। हमारा परिवार राजनीति वाला रहा है, इसलिए परिवार में परेशानी नहीं होती है। पत्नी का भी बहुत सहयोग मिलता है। वह सामाजिक कार्यक्रमों में पहले से ही जाती रही है। अब वह ज्यादा कार्यक्रमों में जाती हैं। जहां तक मां का सवाल है तो वह बहुत खुश रहती हैं। मां बताती है जब हमारा नामकरण संस्कार हुआ था तो हमारे कुल पुरोहित ने कहा था, आपका यह बेटा आगे चलकर बड़ा आदमी बनेगा। ग्रामीण परिवेश में वह रहती हैं तो उनको यहां का वातावरण ज्यादा पसंद नहीं आता है तो कुछ दिन यहां रहकर चली जाती हैं।

राष्ट्रीय नेतृत्व क्या महसूस करता है आपके कार्यकाल को?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली और मुंबई में उनसे मुलाकात हुई थी। प्रधानमंत्री से भी मुलाकात होती रहती है, उनका मार्गदर्शन लेते रहते हैं। उनसे प्रोत्साहन मिलता रहता है।

आगे चार साल के लिए क्या रोड मैप है, कहां ले जाना है छत्तीसगढ़ को ?
बिलकुल विजन तैयार किया है। 2047 तक देश को विकसित भारत बनाने का है तो हम लोगों से भी विकसित छत्तीसगढ़ की विजन बनाया है। सभी वर्गों के साथ बैठकर विजन तैयार किया है। छत्तीसगढ़ में खुशहाली और शांति का पूरा प्रयास रहेगा। मोदी की गारंटी को भी पूरा करेंगे और छत्तीसगढ़ में सुशासन का प्रयास रहेगा। यहां पर भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी।

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