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दुर्ग संसदीय सीट से चुनाव लड़ रहे बलदेव साहू ने बताया कि वे 2018 के विधानसभा चुनाव में भी खड़े हुए थे। 

दुर्ग। मैं सक्रिय राजनीति में रहा हूं। कई नेताओं से जुड़ा रहा। महसूस किया है कि यहां आम आदमी की कोई सुनवाई नहीं होती। नेता भी केवल उपयोग करते हैं। मैं कोई इतना बड़ा आदमी नहीं हूं कि चुनाव लड़ने के लिए 25 हजार खर्च कर सकूं। बीपीएल कार्ड धारी हूं। लेकिन मैंने कई महीने की मेहनत के बाद पैसों का जुगाड़ किया और चुनाव लड़ रहा हूं। केवल इसलिए कि आम आदमी को गंभीरता से लें। दुर्ग संसदीय सीट से चुनाव लड़ रहे बलदेव साहू ने बताया कि वे 2018 के विधानसभा चुनाव में भी खड़े हुए थे। जिसके बाद वे अब फिर से लोकसभा चुनाव के लिए मैदान में कूद गए हैं। उन्हें लोग फेरीवाले के नाम से जानते हैं। 

कई सालों से उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए पच्चीस हजार रूपए जोड़े हैं। यह इतना आसान नहीं है। साइकिल में रोज वे नहे-मुरकु, झाडू, पोछा लगाने की डंडी व खिलौने का सामान बेचने निकलते हैं। जिससे आय की राशि को जोडकर वे नामांकन फार्म खरीद पाए हैं। उन्होने संपत्ति के ब्योरे में बताया कि, वे बीपीएल कार्डधारी है। पिता सुखीराम साहू से उन्हें डेढ़ एकड खेती जमीन मिली है उसी से गुजारा हो रहा है।

मां के इलाज के लिए मांगे दस हजार 

बलदेव साहू बताते है कि, वे अपनी मां की आंखों का आपरेशन कराने अस्पताल पहुंचे थे। लेकिन उनसे निशुल्क होने वाले आपरेशन के लिए दस हजार रूपए की मांग की गई। इस दौरान उन्हें गहरा सदमा पहुंचा। उन्होंने बताया कि, उरला वार्ड की रिक्त जमीन पर मुक्तिधाम में शेड बनाने कई सालों से मांग की गई। इस मांग के लिए वे नेताओं से फरियाद की, जिसके बाद यह कार्य हो पाया है। उनका कहना है कि, जब तक राजनीतिक के जरिए दबाव नहीं बनता, तब तक आम आदमी की मुरादे पूरी नहीं होती है। इसलिए वे आम आदमी की आवाज बनना चाहते हैं।

प्रिंस के पास 5 हजार, चुनाव में बजाएंगे डंका, गृहणी उर्मिला ने ताल ठोंका

अम्बिकापुर। सरगुजा लोकसभा सीट से भाजपा कांग्रेस के अतिरिक्त विभिन्न राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों ने अपना नामांकन फार्म जमा किया है। लोकसभा चुनाव में दावेदारी करने वाले 7 उम्मीदवार विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े हैं। जबकि 5 ऐसे उम्मीदवार हैं जो निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना फार्म भरे हैं। लोकसभा चुनाव में अपना भाग्य आजमाने वाले उम्मीदवारों में ऐसे लोग भी है जिनके पास धन-संपत्ति और ना ही बैंक बैलेंस है लेकिन वे चुनाव में दो-दो हाथ करने के लिए काफी उतावले हैं। सरगुजा लोकसभा सीट से दावेदारी करने वाली लखनपुर निवासी श्रीमती उर्मिला सिंह घरेलू महिला है। उनके पति किराना की छोटी सी दुकान चलाते हैं। उन्होंने स्नातक तक की है। उनके पास नगद व बैंक में 50 हजार रुपए है। उर्मिला सिंह का कहना है कि चुनाव का प्रचार काफी खर्चीला है लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में व्यवस्था में व्यापक बदलाव लाने की जरूरत ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए मजबूर किया।

25 हजार के सिक्के से खरीदा फार्म

बिलासपुर। पार्षद चुनाव में सिर्फ 12 वोट पाकर भी हिम्मत नहीं हारे और अब लोकसभा चुनाव में दावेदारी कर रहे है पंडित अनिमेष मिश्रा। बिलासपुर के कुदुदण्ड निवासी अनिमेष मिश्रा पुजारी हैं। लोकसभा चुनाव के लिए सिक्कों से भरी बोरी लेकर नामांकन पत्र लेने और जमा करने पहुंचे अनिमेष को अधिकारियों ने लौटा दिया था। इसके बाद चुनाव आयोग के निर्देश पर 25 हजार रुपए के सिक्के से फार्म खरीदा।

गोवर्धन खुद चस्पा रहे अपने पोस्टर

रायगढ़। चुनाव के वक्त हर सरकार किसान और मजदूर के भले की बात जरुर कहती है लेकिन रायगढ़ के मजदूरों की दशा ये बता रही है कि उनका पूरा जीवन दो वक्त की रोटी के जुगत में ही खाते हुए खत्म हो रहा है। मजदूरों की इसी पीड़ा को भोगकर मन में चुनाव लड़ने का संकल्प करते हुए इस बार रायगढ़ लोकसभा से एक आदिवासी महिला पूजा सिदार ने नामांकन दाखिल किया है। वहीं खरसिया विधानसभा के एक अन्य अति लघु किसान उम्मीदवार गोवर्धन राठिया अपने चुनाव प्रचार के पोस्टर भी खुद ही लगा रहे हैं। धरमजयगढ़ विधानसभा के घरघोड़ा ब्लाक अंतर्गत बहिरकेला निवासी पूजा सिदार और उनके पति लोकनाथ सिदार दोनों कामगार मजदूर हैं और आस पास काम ढूंढकर अपना परिवार पाल रहे हैं।सत्ता और सियासत के दावे तथा वालों के बीच आशा तथा नाउम्मीदी के साथ पीढ़ियों से मजदूरी और अभाव ग्रस्त जीवन को करीब से जी रहे सिदार दम्पत्ति ने साल भर पहले ही चुनाव में उतरने का इरादा बना लिया था। निर्दलीय उम्मीदवार पूजा सिदार ने बताया कि लोकसभा चुनाव के उम्मीदवारी के लिए लगने वाले नामांकन शुल्क को उन्होंने अपने पति के साथ रोजी मजदूरी कर जमा किया है।
  

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